करोड़ों की घूस, 60 से ज्यादा मीटिंग... Operation Sindoor रोकने के लिए ट्रंप के सामने गिड़गिड़ाया था पाकिस्तान
अमेरिकी दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को रोकने के लिए अमेरिका पर भारी दबाव बनाया ...और पढ़ें

अमेरिकी दस्तावेजों ने खोली पाकिस्तान की पोल। फोटो - जेएनएन

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अमेरिकी दस्तावेजों में एक और बड़ा खुलासा हुआ है, जिसके साथ ही पाकिस्तान का असली चेहरा फिर से दुनिया के सामने आ गया है। अमेरिकी सरकार के दस्तावेजों की मानें को जम्मू कश्मीर में पहलगाम हमले के बाद से लेकर ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से पहले और 4 दिन के भारत-पाक तनाव के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका पर दबाव बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
पाकिस्तान के राजनियकों समेत रक्षा अधिकारियों ने अमेरिका में 50 से ज्यादा बैठकों की मांग की थी। ये बैठकें अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों, सांसदों और प्रभावशाली मीडिया संस्थानों के साथ प्रस्तावित की गई थीं।
60 से ज्यादा बैठकें कीं
अमेरिकी विदेशी एजेंट पंजीकरण अधिनियम (FARA) के रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि अमेरिका में नियुक्त पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने 60 से ज्यादा बैठकों के लिए ईमेल, फोन कॉल और मीटिंग की थीं। इन बैठकों का मकसद अमेरिका पर भारत के खिलाफ दबाव बनाना था। ऑपरेशन सिंदूर की मार झेल रहा पाकिस्तान, भारतीय कार्रवाई को रोकने के लिए अमेरिका के सामने गिड़गिड़ा रहा था।
-1767693249556.jpg)
बैठकों में क्या बात हुई?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिकी सांसदों के अलावा पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय), राज्य विभागों समेत कई बड़े पत्रकारों से संपर्क करने की कोशिश की थी। इस दौरान कश्मीर मुद्दे से लेकर क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा पर द्विपक्षीय संबंधों और रेयर अर्थ मिनरल्स पर बात हुई थी।
कंगाल मुल्क ने खर्च किए करोड़ो रुपये
अमेरिका को अपने पक्ष में करने के लिए पाकिस्तान ने करोड़ों का दांव लगाया था। नवंबर 2025 में छपी न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने वाशिंगटन की लॉबिंग फर्म को लगभग 5 मिलियन डॉलर (45 करोड़ रुपये) दिया था, जिसका फायदा ट्रंप प्रशासन को भी हुआ था।
-1767693268686.jpg)
ट्रंप को खुश करने में नहीं छोड़ी कसर
रिपोर्ट के अनसार, पाकिस्तान ने जेवलिन एडवाइजर्स के माध्यम से काम कर रही सेडेन लॉ एलएलपी के साथ डील की थी। इसके कुछ हफ्तों बाद ही ट्रंप ने व्हाइट हाउस में पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर का स्वागत किया था। ट्रंप को खुश करने के लिए पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार देने की अपील की। साथ ही पाकिस्तान ने ट्रंप को बिजनेस और व्यापार से जुड़े ढेरों लालच दिए थे।
