ननकाना साहिब, आइएएनएस। पाकिस्तान में एक सिख लड़की का जबरन अपहरण, धर्म परिवर्तन और शादी करने के मामले में आठ में से तीन अभियुक्तों को सजा दी गई है। इनमें से एक को दो साल और दो को छह-छह माह कैद की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने इन पर जुर्माना भी किया है। कोर्ट ने अन्य पांच अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए रिहा कर दिया है। यह घटना ननकाना साहिब में 2019 में हुई थी। यहां जगजीत कौर अपने घर में थी, तभी मुहम्मद हसन और उसके परिवार ने अपहरण कर लिया था।

जगजीत का जबरन धर्म परिवर्तन कराते हुए उससे शादी कर ली थी। अल्ससंख्यकों पर अत्याचार का यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आने के बाद पाकिस्तान की सरकार ने मजबूरी में कार्रवाई शुरू की। इस मामले में सिख समुदाय के प्रदर्शन भी हुए। बाद में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए आठ लोगों की गिरफ्तारी की थी।

गुरुद्वारे के ग्रंथी की बेटी से निकाह के बाद आमने-सामने आ गए थे सिख व मुस्लिम

इमरान चिश्ती सरकारी कर्मचारी है और वह मुहम्मद हसन का बड़ा भाई है। हसन ने कथित तौर पर गुरुद्वारे के ग्रंथी की किशोर बेटी जगजीत कौर का अपहरण और इस्लाम अपनाने को मजबूर करके सितंबर, 2019 में निकाह कर लिया था। इसके बाद ननकाना साहिब में मुस्लिम और सिख समुदाय के लोग आमने सामने आ गए थे। फिलहाल जगजीत कौर लाहौर के सरकारी आश्रय गृह में रह रही है। उसका नया नाम आयशा है। कथित तौर पर उसने फिर सिख धर्म अपनाने और अपने घर लौटने से इन्कार कर दिया है। पुलिस-प्रशासन ने हसन पर उसे तलाक देने का दबाव बनाया है।

जगजीत के भाई मनमोहन सिंह ने आरोप लगाया था कि हसन ने उसकी बहन को अगवा किया था। मनमोहन ने दावा किया कि जब यह घटना हुई, तब जगजीत 16 साल से भी कम उम्र की थी। इससे पहले मायो अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में कोर्ट को बताया था कि जगजीत कौर नाबालिग नहीं है। उसकी उम्र 18 साल से ज्यादा है।

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