नई दिल्ली, ऑनलाइन डेस्क/रॉयटर्स। पाकिस्तान के आर्थिक हालात खराब है। ऐसे में वो अब अपने पुराने दोस्तों से फिर से कर्ज लेने और उन देशों से संबंध बनाने में लग गया है। इसको लेकर सेना प्रमुखों के अलावा अन्य राजनयिकों को इसकी जिम्मेदारी दे दी गई है।

इसी सिलसिले में अब पाकिस्तान के सेना प्रमुख के अलावा अन्य राजनेता दूसरे देशों से इसके बारे में संपर्क साधने में जुट गए हैं। सबसे पहले सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा इसी माह के अंत में सऊदी अरब के दौरे पर जाएंगे। ये दौरा कश्मीर पर कूटनीतिक तनाव को शांत करने और वित्तीय सहायता के लिए अहम मानी जा रही है। 

कश्मीर मुद्दे पर सऊदी अरब के कुछ न बोलने पर दिया था बयान 

दरअसल कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान की ओर से बयान दिया गया था कि कश्मीर मुद्दे पर सऊदी अरब उदासीन रवैया अपनाए हुए हैं वो पाकिस्तान के साथ नहीं खड़ा है। इस तरह की बयानबाजी सामने आने के बाद सऊदी अरब ने पाकिस्तान पर नाराजगी जाहिर की थी। दो दिन पहले कश्मीर मुद्दे पर आर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कंट्रीज (ओआइसी) को दो-फाड़ कर देने की धमकी देना भी पाकिस्तान को महंगा पड़ गया है।

सऊदी अरब ने दिया है 46 हजार करोड़ अरब डॉलर का कर्ज 

सऊदी अरब ने पाकिस्तान को उधार में तेल देना बंद कर दिया है। पाकिस्तान अब गिड़गिड़ा रहा है लेकिन सऊदी अरब अब कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। बता दें कि आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान ने दिवालिया होने से बचने के लिए साल 2018 में सऊदी अरब से 6.2 (करीब 46 हजार करोड़ रुपये) अरब डॉलर का कर्ज लिया था।कश्मीर मुद्दे से पहले तक दोनों देश पारंपरिक तौर पर करीबी माने जाते रहे, इसी वजह से साल 2018 में सऊदी ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर का कर्ज दिया था और 3.2 अरब डॉलर ऑयल क्रेडिट का ऐलान किया था। लेकिन पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मुद्दे पर उसकी आलोचना से चिढ़ गया। 

डैमेज कंट्रोल करने सऊदी अरब जाएंगे बाजवा 

अब इस डैमेज को कंट्रोल करने के लिए पाकिस्तान कदम उठा रहा है। पाकिस्तान सेना के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने ही सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को सऊदी जाने के लिए प्रेरित किया है। जिससे सऊदी अरब से और कर्ज मिल सके और पाकिस्तान का आर्थिक संकट दूर हो सके। पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने भी इस बात की सहमति जताई है कि जनरल बाजवा सऊदी अरब की यात्रा कर रहे हैं।

भारत-पाक में हो चुके तीन युद्ध 

मालूम हो कि कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान अब तक तीन युद्ध लड़ चुके हैं। पाकिस्तान जबरन भारत वाले कश्मीर पर दावा ठोकता आया है जबकि जम्मू-कश्मीर शुरू से ही भारत का अभिन्न अंग रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी के नेतृ्त्व वाले ओआईसी (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) की उच्च स्तरीय बैठक कश्मीर मुद्दे पर बुलाने की मांग कर रहा था।

पाकिस्तान का कहना है कि भारत अपने नियंत्रण वाले कश्मीर में कथित उल्लंघन कर रहा है लेकिन ओआईसी ने अभी तक निम्न-स्तरीय बैठकें ही की हैं। दरअसल पिछले हफ्ते पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ओआईसी की बैठक को लेकर स्थानीय मीडिया से कहा था कि अगर आप आयोजित नहीं करते हैं तो मैं प्रधानमंत्री इमरान खान को उन इस्लामी देशों की बैठक बुलाने के लिए कहने को मजबूर हो जाऊंगा जो हमारे साथ कश्मीर मुद्दे और उत्पीड़ित कश्मीरियों का समर्थन करते हैं। 

पाकिस्तान की हालत खस्ता

पाकिस्तान के एक करोड़ श्रमिक सऊदी अरब में काम करते हैं। ऐसे में यदि सऊदी अरब पाकिस्तान पर सख्त हो जाता है तो उसके लिए मुश्किलें और बढ़ जाएगी। इसी के साथ सऊदी अरब जाकर कमाने वाले लोगों पर भी इसका असर पड़ना तय है। बीते साल इस्लामाबाद मुस्लिम देशों के मंच से सऊदी अरब के दबाव में अंतिम समय में शामिल होने से पीछे हट गया था। ऐसा माना जा रहा था एक यह मंच ओआईसी के नेतृत्व को चुनौती देने के प्रयास के रूप में बना है। पाकिस्तान सेना के एक अधिकारी और सरकार के सलाहकार का कहना है कि कुरैशी के बयान ने रियाद के गुस्से को दोबारा भड़का दिया है। 

सऊदी अरब ने वापस मांगा एक अरब डॉलर का कर्ज वापस 

दोनों देशों के बीच तल्खी का आलम यह है कि दो हफ्ते पहले एक अरब डॉलर कर्ज चुकाने के लिए पाकिस्तान को चीन से कर्ज लेना पड़ा। ऑयल क्रेडिट बढ़ाने की पाकिस्तान की गुजारिश पर सऊदी अरब ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक ऑयल क्रेडिट का पहला साल 9 जुलाई 2020 को पूरा हो गया। 

इस व्यवस्था में विस्तार के लिए पाकिस्तान का अनुरोध सऊदी अरब के पास विचाराधीन है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों और एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि सऊदी अरब पाकिस्तान से एक अरब डॉलर और वापस मांग रहा है। इससे घबराकर अब पाकिस्तान इसे मैनेज करने के लिए अपने सारे हथकंडे अपनाने पर लग गया है। साथ ही कुछ और कर्ज लेने का प्रस्ताव भी रखने की तैयारी है।

 

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