इस्लामाबाद, एएनआइ। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हमले का ग्राफ दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। हाल के वर्षों में पेशावर इलाके में सिखों और शियाओं पर बढ़े हमले आतंक की एक नई धारा के गवाह हैं। बीते रविवार को ही आतंकियों ने पेशावर के बाजार में दो सिख दुकानदारों को मौत के घाट उतार दिया था। पेशावर पुलिस के अधिकारी एजाज खान ने कहा कि मामले की कई कोणों से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक बात तो स्पष्ट है कि यह आतंकी घटना है।

गांवों तक अपना नेटवर्क पहुंचाने में विफल

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का खुफिया विभाग गांवों तक अपना नेटवर्क पहुंचाने में विफल रहा है। पाकिस्तान स्थित मीडिया आउटलेट द फ्रंटियर पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया विभाग एक सक्रिय रणनीति के बजाय एक प्रतिक्रियाशील सिद्धांत पर चल रहा है। यही कारण है कि बीते कुछ वर्षो में हुई आतंकी घटनाओं में से एक को भी वे पहले से भांप नहीं सके। पिछली सरकार ने भी आतंकवाद पर काबू करने वाली राष्ट्रीय कार्ययोजना (एनएपी) को ठंडे बस्ते में डाल दिया था।

पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के व्यक्ति की हत्या

समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में अल्पसंख्यक अहमदिया समुदाय के 35 वर्षीय अब्दुल सलाम नामक व्यक्ति की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक घटना पंजाब प्रांत के ओकारा जिले की है, जहां हाफिज अली रजा ने अब्दुल की आस्था की वजह से उसे मौत के घाट उतार दिया। पाकिस्तान की संसद ने 1974 में अहमदिया समुदाय को गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया था।

ईशनिंदा में दो गिरफ्तार 

वहीं पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में ईशनिंदा के आरोप में संघीय जांच एजेंसी (एफआइए) ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। ईशनिंदा मामले में दोषी पाए जाने पर उम्रकैद या फांसी की सजा हो सकती है। आरोपियों के नाम मुहम्मद उस्मान शफीक और मैसाम अब्बास हैं। उस्मान लाहौर का तो मैसाम पंजाब के मंडी बहाउद्दीन जिले का निवासी है। दोनों के खिलाफ हजरत और कुरान का अपमान करने की शिकायत की गई थी। अदालत ने दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। 

Edited By: Krishna Bihari Singh