'लश्कर-जैश अनगाइडेड मिसाइल हैं', ख्वाजा आसिफ को सता रहा पाकिस्तान के सीरिया-इराक बनने का डर
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन देश के लिए खतरा बन सकते हैं।
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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को सता रहा डर (फोटो-रॉयटर्स)
HighLights
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आतंकी संगठनों को देश के लिए खतरा माना।
जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा को 'अनगाइडेड मिसाइल' बताया।
पाकिस्तान के सीरिया-इराक जैसी स्थिति में जाने का डर जताया।
डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। पाकिस्तान आतंकवादियों का पनाहगार है। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा को पनाह देने वाला ये देश अब खुद इस डर में है कि कहीं ये आतंकवादी संगठन पाकिस्तान के ही खात्मे ही वजह न बन जाएं।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने देश में पनप रहे आतंकवाद की बात कबूली है। ख्वाजा आसिफ को डर सता रहा है कि जैश और लश्कर की वजह से पाकिस्तान की वो हाल न हो जाए, जो सीरिया और इराक का हुआ है।
ख्वाजा आसिफ को सता रहा डर
पाक के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के हम न्यूज पॉडकास्ट पर पत्रकार जाहिद गिश्कोरी से बातचीत में कहा, 'ये लोग जो हैं वे हथियार उठाते हैं और हुलिए बदल लेते हैं। कभी अमेरिका की जंग लड़नी शुरू कर देते हैं, कभी अपनी जंग लड़नी शुरू कर देते हैं कभी किसी की।'
ख्वाजा आसिफ ने इन आतंकी संगठनों को फ्रेंचाइजी बताते हुए कहा, 'आप देख लें सीरिया का क्या हाल हुआ, ईराक का क्या हाल हुआ। खुदा न खास्ता कहीं हमारा भी वहीं हाल न हो। यह आपकी फौज की ताकत को कम करते हैं।'
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने जैश और लश्कर को ऐसी मिसाइलें बताया, जो उनके देश में भी फट सकती हैं। ख्वाजा आसिफ ने कहा, 'पाकिस्तान को इन मिलिशिया की जरूरत नहीं है। ये अनगाइडेड मिसाइल हैं और किसी के कंट्रोल में नहीं होते। पाकिस्तान के इतिहास के 40-50 सालों ने यह साबित किया है।' ख्वाजा आसिफ का ये पॉडकास्ट 15 सितंबर को रिलीज हुआ था।
शहबाज शरीफ ने भी कबूली थी बात
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पिछले साल यूनाइटेड नेशंस में जो भाषण दिया था, उसका एक हिस्सा फिर से काफी चर्चा में है। यह चर्चा उनके जनरल असेंबली में होने वाले अगले भाषण से ठीक पहले हो रही है।
इस क्लिप में शरीफ को 20 सितंबर 2025 को 80वीं UN जनरल असेंबली में यह कहते हुए सुना जा सकता है, 'अगर हमने इन आतंकवादियों का सामना नहीं किया होता, तो वे न्यूयॉर्क और लंदन की सड़कों पर घूम रहे होते और न जाने कहां-कहां शायद सुदूर पूर्व तक पहुंच गए होते।'
