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पाकिस्तान : सेना की जमीन का इस्तेमाल शादी व सिनेमा के लिए क्यों हो रहा ? सुप्रीम कोर्ट का रक्षा सचिव से सवाल

पाकिस्तान में सेना की जमीन का इस्तेमाल शादी और सिनेमा के लिए किराए पर देने जैसी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देश के रक्षा सचिव से सवाल-जवाब किया और नराजगी जताई।

By TaniskEdited By: Published: Fri, 26 Nov 2021 08:27 PM (IST)Updated: Fri, 26 Nov 2021 08:27 PM (IST)
पाकिस्तान : सेना की जमीन का इस्तेमाल शादी व सिनेमा के लिए क्यों हो रहा ? सुप्रीम कोर्ट का रक्षा सचिव से सवाल
पाकिस्तान का सुप्रीम कोर्ट । (फोटो -एएनआइ)

इस्लामाबाद, पीटीआइ। पाकिस्तान में सेना की जमीन का इस्तेमाल शादी और सिनेमा के लिए किराए पर देने जैसी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए हो रहा है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रक्षा सचिव से सवाल-जवाब किया। देश के मुख्य (CJP) न्यायाधीश गुलजार अहमद और जस्टिस काजी मोहम्मद अमीन अहमद और जस्टिस इजाजुल अहसन की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए सैन्य भूमि का उपयोग करने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही थी। डान अखबार ने बताया कि सीजेपी ने सैन्य भूमि के व्यावसायिक उपयोग को लेकर रक्षा सचिव, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद हिलाल हुसैन से सवाल-जवाब की। इसमें पूछा गया कि क्या 'सिनेमा और शादी के हाल' जैसी संरचनाएं रक्षा उद्देश्यों के लिए बनाई गई थीं?

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सीजेपी ने कहा कि यह जमीन आपको सामरिक और रक्षा उद्देश्यों के लिए दी गई थी और आपने इस पर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं। क्या वेडिंग हाल, सिनेमा और हाउसिंग सोसाइटी रक्षा उद्देश्यों के लिए बनाई गई थीं? उन्होंने टिप्पणी की कि सभी असकारी आवास परियोजनाएं छावनी भूमि पर बनाई गई हैं। रक्षा सचिव ने कहा कि हमने तय किया है कि ऐसा दोबारा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हाउसिंग सोसाइटियों के निर्माण और सैन्य भूमि के व्यावसायिक उपयोग की जांच की जाएगी और इसे रोका जाएगा।

इस पर जस्टिस अमीन ने हुसैन से पूछा कि यह कैसे संभव होगा और प्रक्रिया कहां से शुरू होगी। जस्टिस ने उनसे लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि कर्नल और मेजर राजाओं की तरह काम कर रहे हैं। सीजेपी अहमद ने रक्षा सचिव को आदेश दिया कि सभी सैन्य छावनियों में जाएं और उन्हें बताएं कि भूमि का उपयोग केवल रणनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कराची में मसरूर बेस और फैसल बेस पर व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं और आदेश मिलने पर इमारतों का निर्माण किया गया था। साइनबोर्ड हटाने के लिए दिए गए थे।पीठ ने हुसैन से पूछा कि क्या उनके पास इस मामले के बारे में एक लिखित रिपोर्ट है, जिस पर उन्होंने इसे जमा करने के लिए और समय का अनुरोध किया।


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