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पाकिस्तान: इमरान खान की रिहाई पर अड़ी PTI, शहबाज सरकार की बातचीत के न्योते को बताया 'ढोंग'

Published: Wed, 07 Oct 2026 11:32 AM (IST)Updated: Wed, 07 Oct 2026 11:34 AM (IST)

पाकिस्तान में शहबाज सरकार और इमरान खान की पार्टी पीटीआई के बीच राजनीतिक गतिरोध गहरा गया है। पीटीआई ने सरकार ...और पढ़ें

पाकिस्तान पीएम की धमकी पर PTI का पलटवार।

पाकिस्तान पीएम की धमकी पर PTI का पलटवार।

HighLights

  1. पीटीआई ने शहबाज सरकार के बातचीत प्रस्ताव को ढोंग बताया।

  2. इमरान खान से मिलने पर लगी पाबंदी हटाने की मांग।

  3. खैबर पख्तूनख्वा में पीटीआई का लॉन्ग मार्च जारी।

डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। दुनियाभर में कटोरा लेकर घूम रहा पाकिस्तान इन दिनों आंतरिक राजनीति कलह से गुजर रहा है। वजह है कि पूर्व पाकिस्तानी पीएम इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर अड़े पाकिस्तान तहरीक-ए-इनसाफ (PTI) के समर्थकों ने शहबाज सरकार का सिर दर्द बढ़ा दिया है।

ऐसे में पाकिस्तान सरकार की किरकिरी तब ज्यादा हो गई, जब प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इनसाफ (PTI) को बातचीत का न्योता तो दिया, लेकिन पीटीआई ने इसे महज एक ढोंग और दिखावा बताकर खारिज कर दिया है।

बातचीत का ऑफर या सियासी ड्रामा?

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक कार्यक्रम के दौरान पीटीआई को चेतावनी दी थी कि वे इस्लामाबाद की तरफ अपना लॉन्ग मार्च रोक दें, क्योंकि इससे देश की अर्थव्यवस्था तबाह हो रही है। उन्होंने कहा था कि होश में आओ, लॉन्ग मार्च और धरना खत्म करो, फिर हम तुम्हारे साथ बैठेंगे।

लेकिन इस पर पलटवार करते हुए पीटीआई के प्रवक्ता और नेता गौहर ने शहबाज सरकार की पोल खोल दी। उन्होंने कहा कि शहबाज सरकार का यह ऑफर केवल सांकेतिक है। सरकार ने बातचीत की बात तो हवा में कर दी, लेकिन जमीन पर ऐसा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जिससे उनकी नीयत साफ दिखे।

एक साल से इमरान खान से मिलने पर लगा है पहरा

पीटीआई ने सरकार से सवाल किया कि अगर वे वाकई गंभीर हैं, तो पिछले एक साल से उनके संस्थापक और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को पार्टी नेताओं से मिलने क्यों नहीं दिया जा रहा?

रावलपिंडी में पत्रकारों से बात करते हुए पार्टी नेताओं ने बताया कि इमरान खान से आखिरी मुलाकात पिछले साल अक्टूबर में हुई थी, उसके बाद से सरकार ने मिलने पर पूरी तरह पाबंदी लगा रखी है। एक तरफ सरकार बातचीत का ढिंढोरा पीट रही है, दूसरी तरफ पार्टी सुप्रीम कोर्ट के नेता को सलाखों के पीछे अकेला छोड़कर लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोट रही है।

सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद जारी रहा मार्च

इस बात को ऐसे समझिए कि एक तरफ सरकार धमकियां दे रही थी, तो दूसरी तरफ खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी के नेतृत्व में पीटीआई का लॉन्ग मार्च और ज्यादा आक्रामक अंदाज में आगे बढ़ता गया।

कोहत पहुंचने पर समर्थकों ने जिस तरह स्वागत किया, उससे सरकार के माथे पर बल पड़ गए हैं। मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने दो टूक कहा कि वह इमरान खान के सिपाही हैं और दुनिया की कोई ताकत उन्हें खरीद नहीं सकती।

अपनी जीद पर अड़ी पीटीआई

गौरतलब है कि सरकार और विपक्ष के बीच नेशनल एसेंबली स्पीकर अयाज सादिक के नेतृत्व में हुई बातचीत पहले ही फेल हो चुकी है, क्योंकि सरकार चाहती थी कि पीटीआई चुपचाप घर बैठ जाए, जबकि पीटीआई अपनी जिद पर अड़ी है कि पहले उनके नेता इमरान खान से मिलने की इजाजत दी जाए।