इस्लामाबाद, एएनआइ। पाकिस्तान में लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों की हालत बहुत ही चिंताजनक है। यहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों के साथ हिंसा और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी हालत खराब है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय की हाल में जारी की गई रिपोर्ट में इसका सिलसिलेवार कच्चा चिट्ठा खोला गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में हमेशा हिंसा का खतरा बना रहता है। यहां गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तारी की घटनाएं बढ़ रही हैं। पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज किए जाते हैं और इंटरनेट मीडिया पर भी सेंसरशिप बढ़ रही है। महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं।

भीड़ की हिंसा का शिकार हो रहे अल्पसंख्यक

देश में अधिकारियों में भ्रष्टाचार बढ़ने के साथ ही जांच के नाम पर हिरासत में मौत की घटनाओं में भी इजाफा हुआ है। पाकिस्तान मानव तस्करी के मामले में भी आगे है। इसका सीधा प्रभाव महिलाओं पर पड़ रहा है। अल्पसंख्यकों को दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर देश के हर हिस्से में हमले की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे मामलों में सरकारी तंत्र भी अल्पसंख्यकों की मदद नहीं करता है। भीड़ की हिंसा के मामले बहुत ही कम मामले दर्ज किए जाते हैं। इनके शिकार ज्यादातर हिंदू, ईसाई, अहमदी और शिया होते हैं। उनके धर्मस्थलों पर हमला आम बात है।

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