लंदन, आइएएनएस। इंग्लैंड में निर्वासित जीवन बिता रहे पाकिस्तानी नेता एवं मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (Muttahida Qaumi Movement, MQM) के प्रमुख अल्ताफ हुसैन (Altaf Hussain) ने भारत से शरण मांगी है। उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से गुजारिश की है कि वह उनको भारत में शरण दें या फिर आर्थिक मदद प्रदान करें। मालूम हो कि पाकिस्तान में आतंकवाद के अपराध मामलों में आरोपी अल्ताफ हुसैन इन दिनों लंदन में रह रहे हैं।

हुसैन ने साल 2016 में यूके से पाकिस्तान में अपने अनुयायियों के लिए एक कथित घृणास्पद भाषण प्रसारित करने के आरोप है। इसमें उन्‍होंने अपने अनुयायियों से कानून हाथ में लेने का आह्वान किया था। आतंकवाद के अपराध से जुड़े इस मामले में बीते 10 अक्‍टूबर को यूके के क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विसेज ने उनके खिलाफ आरोप तय किए थे। उनके खिलाफ आतंकवाद से जुड़े इस मामले में जून 2020 में मुकदमा चलने वाला है।

उक्‍त कारणों की वजह से उन्‍हें किसी भी यात्रा दस्तावेज के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं है जब तक कि अदालत की ओर से उन्‍हें इस बात की इजाजत नहीं मिल जाए। अब वकील इसका आकलन कर रहे हैं कि अल्ताफ हुसैन (Altaf Hussain) ने भारत से शरण मांगकर कहीं जमानत की शर्तों का उल्‍लंघन तो नहीं किया है। इससे पहले भी हुसैन यह बयान दे चुके हैं कि वह भारत जाना चाहते हैं क्योंकि उनके दादा-दादी वहीं दफन हैं।

अल्ताफ हुसैन ने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि यदि पीएम मोदी मुझे भारत आने की इजाजत देते हैं और वहां शरण मिलती है तो मैं अपने साथियों के साथ भारत पहुंच जाऊंगा क्योंकि मेरे दादा और दादी को वहीं दफनाया गया है। मेरे हजारों रिश्‍तेदारों को भारत में दफनाया गया है। मैं भारत में उनकी कब्रों पर जाना चाहता हूं। बता दें कि अल्ताफ हुसैन 27 साल पहले पाकिस्तान से भागकर लंदन आ गए थे। वह लंदन से ही अपनी पार्टी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट का कामकाज देखते हैं।

साल 1984 से अल्ताफ हुसैन उर्दू भाषी मुहाजिरों के अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं। मुहाजिर वो शरणार्थी हैं जो आजादी के बाद भारत से पाकिस्तान चले गए थे। कनाडा की फेडरल कोर्ट मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट को 2006 में आतंकी संगठन करार चुकी है। अल्ताफ हुसैन के बयान को पाकिस्तानी मीडिया में दिखाने की इजाजत नहीं है। लाहौर हाईकोर्ट ने सितंबर 2015 से ही अल्ताफ की तस्वीर या बयान के प्रसारण पर रोक लगा रखा है।

साल 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने सेना भेजकर कराची में एमक्यूएम और उसके कार्यकर्ताओं का बुरी तरह दमन किया था। उस समय कराची में हजारों लोग मारे गए थे। साल 1992 में अल्‍ताफ हुसैन पाकिस्‍तान से ब्रिटेन चले गए थे। साल 2002 में उन्‍हें ब्रिटेन की नागरिकता भी मिल गई थी। अल्‍ताफ हुसैन पर पाकिस्तान में 3576 मामले चल रहे हैं। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में इस वक्त MQM के 25 सांसद हैं।

Posted By: Krishna Bihari Singh

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