नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। पाकिस्तान पर चौतरफा मार पड़ रही है। एक ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके ऊपर आतंकियों से निपटने और उनकी फंडिंग को रोकने का दबाव बना हुआ है तो दूसरी ओर वहां के रहने वाले गंदगी और बीमारियों से खासे परेशान है।

आंकड़ों को देखें तो पाकिस्तान की आने वाली पीढ़ी पोलियो जैसी बीमारी का शिकार हो रही है। बीते साल के मुकाबले पाकिस्तान में इस साल पोलियो के मामले में बड़ा उछाल आया है। पोलियो का ड्रॉप पिलाए जाने के मामले में मुस्लिम परिवारों पर कहीं पर धर्म आड़े आ जा रहा है तो कहीं पर अफवाह के चलते वो अपने बच्चों को ये ड्रॉप नहीं पिला रहे हैं जिसका नतीजा आने वाले समय में दिख ही जाता है।

पोलियो ग्रस्त बच्चों की संख्या में होता जा रहा इजाफा 

पाकिस्तान में इस साल पोलियो के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पाकिस्तान में इस बीमारी को जड़ से खत्म करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। दरअसल पोलियो विरोधी अभियान में जो कर्मचारी लगे होते हैं उनके साथ आए दिन मारपीट की जा रही है। इस वजह से वो कई बार इलाकों में दवा पिलाने के लिए ही नहीं जाते हैं।

साल 2018 में पाकिस्तान में पोलियो के 12 मामले सामने आए थे जबकि इस साल अभी तक 72 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। अभी भी ये साल खत्म होने में दो माह का समय शेष है, ऐसे में ये उम्मीद है कि पोलियो के मामलों की संख्या और अधिक निकलेगी। संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक मदद से इस कार्यक्रम को चलाया जा रहा है। बीते 5 सालों के दौरान 2019 में पोलियो के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।

अफगानिस्तान, नाइजीरिया और पाकिस्तान ही पोलियो से जूझ रहे 

दुनिया में अब सिर्फ दो देश अफगानिस्तान और पाकिस्तान ही ऐसे हैं जहां पर बच्चे पोलियो जैसी बीमारी से जूझ रहे हैं। इसके अलावा नाइजीरिया में भी इस्लामी कट्टरपंथ अधिक है, इस वजह से वहां से भी इसे जड़ से खत्म करना मुश्किल हो रहा है।

जब पूरी दुनिया में पोलियो से पीड़ित बच्चों की संख्या 223 बताई गई थी उस समय नाइजीरिया में अकेले इसके 122 मामले दर्ज किए गए थे। अब ये ही तीनों देश पोलियो की बीमारी से परेशान है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से ऐसे देशों को ये सलाह दी जा रही है कि पोलियो का खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। अभी इसको पूरी तरह से रोकने के प्रयास करने होंगे।

कुछ इलाकों में अभियान चलाना मुश्किल 

पाकिस्तान में कुछ इलाके ऐसे हैं जो धर्म के मामले में बहुत ही कट्टर है। वहां पर बच्चों को पोलियो के ड्रॉप पिलाना बहुत ही मुश्किल है। ड्रॉप पिलाने वाले जब ऐसे लोगों के घर पहुंचते हैं तो वो सीधे-सीधे ड्रॉप पिलाने से मना कर देते हैं, उसके बाद यदि ये लोग उनके बच्चों को इस ड्रॉप के न पिलाने से होने वाली बीमारी के बारे में बताते हैं तो इनके साथ मारपीट तक हो जाती है। तालिबान चरमपंथी इसके खिलाफ है। वैसे ये इलाका सेना के नियंत्रण में है मगर उसके बाद भी यहां पर पोलियो के मामलों में इजाफा हो रहा है। साल 2014 में सेना ने तालिबान के खिलाफ अभियान शुरू किया था, उस साल पाकिस्तान में पोलियो के कुल 304 मामले सामने आए थे। वहीं 2017 में पोलियोके सबसे कम 8 मामले दर्ज किए गए।

पोलियो का वायरस कैसे पहुंचाता है नुकसान 

पोलियो का वायरस खास तौर से मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचाता है। इस वजह से बच्चों के शरीर की मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और लकवा हो सकता है। यह वायरस सिर्फ बच्चों को अपना शिकार बनाता हैं। चूंकि उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत अधिक नहीं होती है इस वजह से वो जल्द ही इस वायरस का शिकार हो जाते हैं।

बच्चे होते हैं शिकार 

डॉक्टरों का कहना है कि पोलियो सबसे ज्यादा 5 साल से कम उम्र के बच्चों को ही प्रभावित करता है। एक अनुमान के अनुसार हर 200 बच्चों में से एक बच्चे का पैर पोलियो की वजह से खराब हो जाता है। इसके अलावा 5 से 10 फीसदी बच्चों को सांस लेने में भी मुश्किल होता है और उनकी मौत हो जाती है।

जड़ से खत्म नहीं हुआ मामला 

भारत के अलावा कुछ अन्य देशों में तो पोलियो के मामले पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं मगर इस्लामिक देशों में अभी भी इनके मामले सामने आते रहते हैं। साल 2016 में पाकिस्तान में ही पोलियो के 35 मामले दर्ज किए गए थे। इससे पहले भी और भी बुरा हाल था, 1988 में पोलियो से पीड़ित बच्चों की संख्या साढ़े तीन लाख थी। पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरता के कारण भी इस तरह के अभियानों को पलीता लगता रहता है।

गंदगी सबसे बड़ा कारण 

पोलियो का वायरस गंदगी के कारण फैलता है। चूंकि अब भी दुनिया भर में पीने का साफ पानी मिलना मुश्किल है। इस वजह से ये बीमारी तेजी से फैलती है और बच्चों को चपेट में ले लेती है।

अब भी लाइलाज 

पोलियोमाइलिटिस या पोलियो दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड की एक बीमारी है, ये बीमारी वायरस से होती है। इस वायरस से कुछ ही घंटों के अंदर शरीर में लकवा मार जाता है, जिसे कभी ठीक नहीं किया जा सकता।  

Posted By: Vinay Tiwari

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