इस्‍लामाबाद, पीटीआइ। पाकिस्‍तान के आर्थिक हालात किसी से छिपे नहीं हैं, वहां पेट्रोल 100 रुपये प्रतिलीटर के पार पहुंच गया है और दूध 140 रुपये प्रतिलीटर। वहीं, रोटी के बढ़े हुए दामों को नियंत्रित करने के लिए सरकार को हस्‍तक्षेप करना पड़ा। ऐसे में पाकिस्‍तान इंटरनेशनल एयरलाइंस(पीआइए) की 46 फ्लाइट अगर खाली ही रवाना कर दी गई हों, तो इसे पागलपन ही कहा जाएगा। ये खुलासा पाकिस्‍तान की मीडिया ने ही किया है, जिसके मुताबिक, पीआइए ने 46 फ्लाइट खाली ही रवाना कर दीं। पाकिस्‍तान के खजाने को इससे करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ। ऑडिट रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ। अब मामले की जांच कराई जा रही है।

हज जाने वाली 36 फ्लाइट भी खाली

ऑडिट रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि इस्लामी मुल्क की 36 ऐसी फ्लाइट खाली गईं, जिनमें हज यात्रियों को जाना था। इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि पीआइए को को पवित्र मक्का-मदीना जाने के लिए भी हज यात्री ही नहीं मिले। लेकिन इसके बावजूद विमान को खाली ही रवाना कर दिया गया। बता दें कि पाकिस्‍तान की सरकार एयरलाइंस में हो रही इस धांधली पर जियो न्यूज ने रिपोर्ट प्रसारित की है। इसमें ऑडिट रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। हालांकि, ये यह मामले सिर्फ एक साल (2016 से 2017) के हैं। इसके बाद के मामलों की जांच जारी है।

18 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का घाटा

पाकिस्‍तान इंटरनेशनल एयरलाइंस का संचालन सरकारी खजाने से होता है। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल 46 इंटरनेशनल फ्लाइट ऐसी थीं, जिनमें सिर्फ क्रू मेंबर ही थे, कोई यात्री इनमें नहीं था। खाली उड़ानों की वजह से पीआइए को 18 करोड़ पाकिस्तानी रुपए का घाटा हुआ। बता दें कि पाक प्रधानमंत्री इमरान खान पिछले दिनों अमेरिका दौरे पर गए थे। देश की आर्थिक स्थिति को देखते हुए, वे निजी विमान की जगह कतर एयरवेज की फ्लाइट से आम लोगों के साथ बैठकर गए थे।

पाकिस्‍तान ने मांगी सऊदी अरब, चीन और संयुक्त अरब अमीरात से मदद

इस मामले में प्रशासन को जानकारी दी जा चुकी थी। बावजूद इसके कोई जांच नहीं की गई। बता दें कि अपनी अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए हाल ही में पाकिस्तान ने सऊदी अरब, चीन, संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देशों से वित्तीय मदद ली है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान का कर्ज 6 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। मूडीज के 39 महीने के करार के अलावा दूसरे देशों से लिए कर्ज और उसके ब्याज के भुगतान की वजह से फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और चालू खाता घाटे में भी गिरावट आई है। बढ़ते कर्ज के कारण देश की वित्तीय स्थिति और कमजोर होगी। कर्ज वहन करने की उसकी क्षमता पर भी असर पड़ेगा।

Posted By: Tilak Raj

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