ऑपरेशन सिंदूर की टीस: भारत से सस्ते टीके न मिल पाने से कराह रहा पाकिस्तान, खरीदने के लिए नहीं है धन
ऑपरेशन सिंदूर की मार पाकिस्तान को अब भी रह-रहकर टीस दे रही है। पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने ...और पढ़ें

भारत से सस्ते टीके न मिल पाने से कराह रहा पाकिस्तान (फाइल फोटो)
HighLights
ऑपरेशन सिंदूर की टीस- पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, टीकों के आयात से चरमराई आर्थिक हालत
बच्चों को 13 तरह के टीके लगवाती है पाकिस्तान सरकार, एक भी देश में नहीं बनता
पीटीआई, कराची। ऑपरेशन सिंदूर की मार पाकिस्तान को अब भी रह-रहकर टीस दे रही है। पाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत से पाकिस्तान को मिलनेवाली सस्ते टीकों की खेप पर रोक लगने से पाकिस्तान की आर्थिक हालत चरमरा गई है।
बता दें कि दुनिया के सबसे गरीब देशों के बच्चों को टीके उपलब्ध कराने के लिए काम करने वाली एक वैश्विक सार्वजनिक-निजी स्वास्थ्य साझेदारी 'ग्लोबल अलायंस फार वैक्सीन्स एंड इम्यूनाइजेशन (जीएवीआइ)' के माध्यम से पाकिस्तान को भारत से सस्ते टीके मिलते थे। बेहद तनावपूर्ण माहौल में भी ये सप्लाई कायम रहती थी।
पाकिस्तान सरकार अपने नागरिकों को 13 तरह के टीके निशुल्क लगवाती है, लेकिन इनमें से एक भी पाकिस्तान में नहीं बनता। कमाल ने बताया कि फिलहाल, पाकिस्तान 40 करोड़ डालर के टीके सालाना आयात करता है, जिसका लगभग 49 प्रतिशत लागत भार जीएवीआइ का संचालन करनेवाला अंतरराष्ट्रीय संगठन वहन करता है। वहीं पाकिस्तान पर 51 प्रतिशत लागत भार पड़ता है।
कमाल ने कहा कि यदि स्थानीय स्तर पर टीकों का उत्पादन शुरू नहीं हुआ तो 2031 तक सालाना आयात बिल 1.2 अरब डॉलर तक जा पहुंचेगा।
उन्होंने ये भी कहा कि 2031 के बाद टीकों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन भी नहीं मिलेगा। दुनिया की पांचवी बड़ी आबादी वाला देश पाकिस्तान में सालाना 62 लाख बच्चे जन्म लेते हैं। ऐसे में टीकों की मांग तेजी से बढ़नेवाली है।
गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 भारतीयों के मारे जाने की प्रतिक्रिया स्वरूप भारत ने सात मई को पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में स्थित आतंकी संगठनों के ठिकानों पर हमले के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। पाकिस्तान की तरफ से संघर्ष विराम की गुहार पर 10 मई को हमले रोके गए थे।
