नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व खास तौर पर खतरनाक हथियारों से उत्पन्न खतरे पर विश्वसनीय रिपोर्ट पेश करने वाली एजेंसी फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (एफएएस) की ताजी रिपोर्ट से साफ है कि पश्चिमी देश ही नहीं एशिया के जिस हिस्से में हम हैं वह भी खतरनाक परमाणु हथियारों का बड़ा जखीरा बन रहा है।

तीन दिन पहले एफएएस की जारी रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में अभी 280-300 परमाणु हथियारों की क्षमता है जबकि भारत के पास यह आंकड़ा 260 से 280 हो सकती है। चीन 560 परमाणु हथियारों के साथ बेहद आगे है।

यह रिपोर्ट यह भी कहती है कि भारत या पाकिस्तान ने अपने परमाणु हथियारों को रणनीतिक तौर पर तैनात नहीं किया है। लेकिन इन्होंने अपने कुल जखीरे का तकरीबन आधा अपने सैन्य एजेंसियों को सुपुर्द जरूर कर दिया है। मसलन, पाकिस्तान ने 140-150 परमाणु हथियारों को रिजर्व में रखा है जबकि इतने ही हथियारों को इसने सैन्य संचालन के लिए संबंधित एजेंसियों को सौंपे है। जबकि भारत के रिजर्व में 130-140 हथियार हैं और इतने ही सैन्य एजेंसियों को दिए गए हैं। 
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इस एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर कोरिया के पास महज 10-20 परमाणु हथियार ही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन ने संयुक्त तौर पर तकरीबन 3600 परमाणु हथियारों को पूरी तरह से आक्रमण के लिए रणनीतिक तौर पर तैनात कर रखा है। रणनीतिक तौर पर तैनाती का मतलब यह हुआ कि ये हमेशा हमला के लिए तैयार रहते हैं। चीन ने संभवत: अभी रणनीतिक तौर पर तैनाती नहीं की है।

परमाणु हथियारों पर एफएएस की जारी होने वाली सालाना रिपोर्ट के विश्वसनीय माने जाने के पीछे वजह यह है कि यह उन तमाम स्रोतों का भी आकलन करता है जिसके आधार पर अनुमान लगाया गया है। इसमें पाकिस्तान के सैन्य अड्डों, एयर फोर्स के तमाम ठिकानों के अध्ययन के आधार पर कहा गया है कि वहां लगातार परमाणु हथियारों के संग्रह को बढ़ाने और उन्हें लक्ष्य तक पहुंचाने की तैयारियां चल रही हैं।
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इसमें यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान के परमाणु जखीरे की क्षमता को लेकर अमेरिका की खुफिया एजेंसियां जो अनुमान लगा रही हैं असलियत में उसकी क्षमता उससे काफी ज्यादा है। अमेरिकी डिफेंस इंटेलीजेंस एजेंसी ने वर्ष 1999 में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पाकिस्तान वर्ष 2020 तक 60-80 परमाणु बम बनाने लायक प्लूटोनियम हासिल कर लेगा।

रिपोर्ट में एक बात यह भी कही गई है कि पाकिस्तान परमाणु हथियारों से लैस कम दूरी वाले के मिसाइलों के विकास पर खास तौर पर ध्यान दे रहा है। इससे यह अनुमान लगाया गया है कि वह अपने सिर्फ भारत के साथ परमाणु युद्ध के लिए ही तैयारी नहीं कर रहा है बल्कि भारत से पारंपरिक युद्ध के समय भी इस्तेमाल करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
 

Posted By: Vikas Jangra