नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। इमरान खान के 13 महीने के कार्यकाल में पाकिस्‍तान की हालत दिनोदिन खराब होती गई है। पाकिस्‍तान में भ्रष्‍टाचार का बोलबाला बढ़ा है। प्रशासनिक भ्रष्‍टाचार से करोबारी और आम जनता कराह रही है। वहीं गरीबी नित नए रिकॉर्ड बना रही है। अपराध के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार की नाकामियों को लेकर जनता सवाल पूछ रही है जिससे परेशान इमरान खान मीडिया को मैनेज करने में जुटे हैं। आइये जानते हैं कि इमरान खान के इन 13 महीनों के कार्यकाल में पाकिस्‍तान ने कैसा सफर तय किया है...

पहले से अधिक भ्रष्ट हुआ पाक

समाचार एजेंसी आइएएनएस की मानें तो भ्रष्टाचार को लेकर ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की सालान रिपोर्ट को तैयार करने में योगदान देने वाले आठ अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में से दो ने साल 2019 की अपनी रिपोर्ट में पाकिस्‍तान की पोल खोल दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में भ्रष्टाचार पहले से बढ़ा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक, भ्रष्टाचार के मामले में पाकिस्तान की रैंकिंग 101 से दो स्‍थान खिसककर 99 पर आ गई है।

...और बढ़ेंगी मुश्किलें

पाकिस्तान के लिए यह रिपोर्ट टेंशन देने वाली है। इसके आधार पर ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल अगले साल अपनी सालाना करप्शन पर्सेप्शन इंडेक्स (सीपीआई) रिपोर्ट बर्लिन में जारी करेगी। यदि सीपीआई रिपोर्ट में पाकिस्‍तान स्‍कोर खराब रहा तो उसे विदेशों से कर्ज मिलने में भी मुश्किलें पेश आएगी। ऐसा इसलिए क्‍योंकि देशों को कर्ज देने में फंडिंग एजेंसियां सीपीआई स्कोर को बेहद अहमियत देती हैं। स्कोर खराब होने पर आर्थ‍िक मदद की शर्त बेहद कठोर हो जाती है।

विदेशों में 11 अरब डॉलर की ब्‍लैक मनी

बीते दिनों सामने आए आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि विदेशी बैंकों में पाकिस्‍तानी पूंजीपतियों के 152,500 से अधिक खातों में 11 अरब डॉलर काला धन जमा है। यही नहीं पाकिस्‍तानियों ने जितनी रकम गुप्‍त रूप से विदेशों में जमा की है, उनमें से आधी से अधिक अघोषित है। सरकार का कहना है कि यदि पाकिस्‍तान इस धन को वापस लाने में सक्षम हो जाए तो उसे विदेशों से भीख मांगने की नौबत नहीं आएगी।

कारोबारियों का डगमगाया भरोसा

यही वजह है कि इमरान खान ने सारी एजेंसियों को काला धन रखने वालों की पड़ताल करने में लगा दिया है। इस आदेश की एवज में पाकिस्‍तानी एजेंसियों के अधिकारी भी अपनी मनमानियों पर उतर आए हैं। नतीजतन प्रशासनिक भ्रष्‍टाचार को और हवा मिलती दिख रही है। पाकिस्‍तानी कारोबारियों का भरोसा इमरान खान की सरकार से डिगने लगा है। बीते दिनों कारोबारियों ने सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा से मुलाकात करके शिकायत की थी कि सरकार की एजेंसियां उन्‍हें बिना वजह पारेशान कर रही हैं।

32,240 अरब रुपये का कर्ज

इमरान खान कर्जे लेकर कर्ज चुकाने के फॉर्मूले पर काम कर रहे हैं। नतीजतन पाकिस्‍तान और कर्ज के दलदल में धंसता जा रहा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान को जून 2022 तक 6.7 अरब डॉलर चीन को और 2.8 अरब डॉलर आईएमएफ को कर्जों की भरपाई के तौर पर चुकाना है। आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2019 तक पाकिस्‍तान को कुल छह लाख करोड़ रुपये से ज्‍यादा का कर्ज चुकाना था। मौजूदा वक्‍त में पाकिस्‍तान 32,240 अरब रुपये के कर्ज में डूबा हुआ है। यही नहीं इमरान खान के सत्‍ता में आने के बाद तो इसमें 7508 अरब रुपये का इजाफा हुआ है।

भुखमरी की नौबत

पाकिस्‍तान में पिछले साल महंगाई दर 3.9 फीसद थी जो बढ़कर 7.3 फीसद पर पहुंच गई है। अनुमान है कि अगले साल यह 13 फीसद तक पहुंच सकती है। पिछले महीने पाकिस्तानी अखबार डॉन (Dawn) की रिपोर्ट में कहा गया था कि शादियों (निकाह) का सीजन शुरू होने से पहले पाकिस्तान में चिकन के दाम सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। साथ ही फलों, सब्जियों और दूध समेत कई उत्पादों के दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर हो चले हैं। लोगों पर भुखमरी की नौबत है जिससे निपटने के लिए इमरान खान सरकारी 'अहसास लंगर' योजना लाने की बात कह रहे हैं।

अपराध के ग्राफ में भी बढ़ोतरी

पाकिस्‍तान में बीते 13 महीनों में भ्रष्‍टाचार ही नहीं बढ़ा है। अपराध के ग्राफ में भी बेतहासा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस साल जनवरी से जून के बीच पाकिस्तान में बच्चों के खिलाफ बाल यौन शोषण के 1300 से अधिक के मामले पाए गए हैं। इस अवधि के दौरान 729 लड़कियों और 575 लड़कों के साथ यौन शोषण की घटनाएं सामने आई हैं। यही नहीं मदरसों में 12 नाबालिग लड़के लड़कियों के साथ यौन शोषण की घटनाएं हुईं। कराची में हथ‍ियारबंद डकैती और सुपारी कीलिंग में 18 लोग मारे गए हैं। सिंध में लूट, छिनैती की घटनाएं बढ़ी हैं।  

डिप्रेशन में जा रहे लोग 

जिन्ना पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सेंटर के डिपार्टमेंट ऑफ साइकियाट्री में आयोजित कार्यक्रम में मनोचिकित्सकों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। डॉक्‍टरों ने कहा कि पाकिस्तान में करीब 33 फीसद लोग अवसाद और बेचैनी की समस्‍या से जूझ रहे हैं। पाकिस्तान के उत्तरी क्षेत्र में तो हालात इतने खराब है कि 66 फीसद महिलाएं डिप्रेशन की शिकार हैं। विशेषज्ञों की मानें तो मुल्‍क में डिप्रेशन से आत्‍महत्‍या की घटनाएं सामने आ रही हैं। आगा खान यूनिवर्सिटी में हुए एक अन्य कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्‍होंने बताया कि पाकिस्तान में शादीशुदा महिलाओं और तीस साल से कम के अविवाहित युवाओं आत्महत्या की दर सबसे ज्‍यादा है। कुछ दिन पहले पाकिस्‍तानी अखबार की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि लोग अपने भविष्‍य और रोजगार की चिंता को लेकर काफी परेशान हैं। 

Posted By: Krishna Bihari Singh

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