ग्लासगो, एएनआइ। गिलगिट-बाल्टिस्तान (गुलाम कश्मीर ) क्षेत्र में पाकिस्तान और चीन मिलकर खनिज संसाधनों का जमकर दोहन कर रहे हैं। चीन के सहयोग से यहां यूरेनियम का खनन और संवर्धन धड़ल्ले से किया जा रहा है। इसमें अंतरराष्ट्रीय नियमों की भी पूरी तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इस बात की स्थानीय लोगों ने भी पुष्टि की है। यूरेनियम का दोहन अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लिए चिंता का विषय है। पाकिस्तान इन एजेंसियों की जानकारी में लाए बिना यह काम कर रहा है।

गिलगिट-बाल्टिस्तान के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के एटोमिक एनर्जी मटेरियल सेंटर (एइएमसी) के विशेषज्ञों की टीम लगातार हैदर आबाद क्षेत्र, हुंजा नगर, स्कर्दू और गिजर क्षेत्र में बनी हुई हैं। ये विशेषज्ञ यूरेनियम के संवर्धन वाले स्थान खैबर पख्तूनख्वा राज्य में मलाकंद के दरगाई गांव का भी दौरा करते रहते हैं।

पूर्व में इस बात की जानकारी मिल चुकी हैं कि पाकिस्तान ने चीन की खनन कंपनियों को प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की खुली छूट दे रखी है। यहां दो हजार से ज्यादा सोना, यूरेनियम और मोलिब्डेनम (इस्पात को कठोरता देने वाली धातु) के पट्टे चीनी कंपनियों को दिए हैं। गिलगिट-बाल्टिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा दोनों ही प्रांतों में यह काम किया जा रहा है।

गुलाम कश्मीर में रहने वाले अधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार डा. अमजद अयूब मिर्जा ने कहा है कि चीनी भूगर्भ विज्ञानी हुंजा नगर में देखे जा सकते हैं। उनके साथ पाकिस्तान के विशेषज्ञों की टीम भी रहती है। यहां के पहाड़ यूरेनियम से समृद्ध हैं। डा मिर्जा ने बताया कि गुलाम कश्मीर में यूरेनियम का खनन करने वाली सबसे बड़ी कंपनी शहजाद इंटरनेशनल है। यह कंपनी अवैध तरीकों से विस्फोट, गैसोलीन से चलने वाली राक ड्रिल मशीनें इस्तेमाल कर रही है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।                                                             

Edited By: Manish Pandey