लाहौर, पीटीआइ। पाकिस्तान की एक अदालत ने पंजाब प्रांत में संघीय यानी केंद्र सरकार की ओर से करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण किए जाने पर सवाल उठाया है। अदालत ने अधिकारियों से पूछा है कि क्या यह प्रांतीय सरकार के मामले में हस्तक्षेप नहीं है? अदालत ने पूछा कि यदि सड़क निर्माण का काम प्रांत का विषय है तो संघीय सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर की परियोजना बनाई कैसे और इसे किस आधार पर नियंत्रित किया।

दरअसल, लाहौर-नारोवाल रोड के निर्माण में अनावश्यक देरी के खिलाफ लाहौर हाई कोर्ट सुनवाई कर रही थी। अदालत के मुख्य न्यायाधीश मुहम्मद कासिम खान ने संघीय कानून अधिकारी से पूछा कि बताईये सड़क निर्माण के लिए कौन जवाबदेह है- संघ या प्रांतीय सरकार। कानून अधिकारी ने अदालत को बताया कि सड़क निर्माण के लिए कोष जारी करने का विषय संघीय सरकार के दायरे में नहीं आता है।

मुख्य न्यायाधीश खान ने पूछा, 'यदि सड़क निर्माण प्रांत का विषय है तो संघीय सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर की परियोजना कैसे तैयार और नियंत्रित की। सरकारें अपनी मर्जी से काम करती हैं या कानून के तहत?' न्यायाधीश ने कहा कि यदि प्रांतीय मामलों में संघीय सरकार से हस्तक्षेप स्थापित होता है तो कोर्ट प्रधानमंत्री को नोटिस जारी कर सकता है। उन्होंने कहा, 'यदि जरूरी हुआ तो हम प्रधानमंत्री को नोटिस भेज सकते हैं।'

मुख्य न्यायाधीश ने दो सप्ताह के लिए सुनवाई स्थगित कर दी। कोर्ट ने अतिरिक्त अटार्नी जनरल इश्तियाक ए. खान को मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। बता दें कि पाकिस्तान सरकार ने बीते दिनों करतारपुर कॉरिडोर को फिर से खोल दिया था। पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच 2019 में किए गए द्विपक्षीय समझौते के अनुसार, भारतीय आगंतुकों को सुबह से शाम तक आने की अनुमति है।

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