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पाकिस्तान की सत्ता और संपत्तियों पर सेना का कब्जा, कोर्ट का आदेश भी बेअसर!

Published: Fri, 11 Sep 2026 07:06 PM (IST)

पाकिस्तान में सेना का प्रभाव अब सुरक्षा से बढ़कर सरकारी संपत्तियों, रियल एस्टेट और कानूनी व्यवस्था पर हावी हो गया है।

पाकिस्तान में सेना का सत्ता और संपत्तियों पर कब्जा (आसिर मुनीर, फाइल फोटो- रॉयटर्स)

पाकिस्तान में सेना का सत्ता और संपत्तियों पर कब्जा (आसिर मुनीर, फाइल फोटो- रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। पाकिस्तान में सेना का प्रभाव केवल देश की सुरक्षा तक सीमित नहीं रही है, बल्कि अब पाकिस्तानी आर्मी सरकारी संपत्तियों, रियल एस्टेट और कानूनी व्यवस्था पर पूरी तरह से हावी हो चुकी है।

लग्जरी सेलिंग क्लबों से लेकर असैधानिक कब्जे वाली जमीनों तक, पाकिस्तानी सेना देश के अहम संसाधनों पर अपने अधिकार को लगातार मजबूत कर रही है।

दरअसल, हाल ही में इस्लामाबाद हाईकोर्ट के 2022 के उस फैसले को चुपचाप पलट दिया गया, जिसमें पाकिस्तान नेवी के 300 एकड़ के आलीशान रियल एस्टेट प्रोजेक्ट और कथित तौर पर सरकारी जमीन पर बने लग्जरी नेवल सेलिंग क्लब को अवैध घोषित किया गया था।

इस फैसले का पलटा जाना इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि कैसे सेना अदालती आदेशों को बेअसर करके सरकारी जमीनों पर अपना मालिकाना हक बढ़ा रही है।

27वां संविधान संशोधन और आसिम मुनीर की शक्तियां

सेना की इस बढ़ती ताकत के पीछे पाकिस्तान का विवादित 27वां संविधान संशोधन सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस संशोधन के जरिए इस्लामाबाद की नागरिक सरकार और प्रशासनिक नियंत्रण को पूरी तरह से रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय (GHQ) के हाथों में सौंप दिया गया है।

इसके साथ ही, पाक के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को आजीवन कानूनी छूट दे दी गई है, जिससे उनके या सैन्य अधिकारियों द्वारा किए गए किसी भी फैसले को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।

इस गठजोड़ (मुनीर-पिंडी) ने पाकिस्तान के लोकतंत्र, न्यायपालिका और अर्थव्यवस्था पर सेना के एकाधिकार को पहले से और अधिक मजबूत कर दिया है।