विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मुनीर ने शहबाज को किया साइडलाइन, सऊदी अरब में और अधिक भेजेंगे पाकिस्तानी फौज

Published: Thu, 08 Oct 2026 09:54 PM (GMT+05:30)

पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने सऊदी अरब में बढ़ते हूती हमलों के बीच और अधिक पाक सैनिकों की ...और पढ़ें

मुनीर ने शहबाज को किया साइडलाइन (फाइल फोटो)

मुनीर ने शहबाज को किया साइडलाइन (फाइल फोटो)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने सऊदी अरब पर बढ़ते हूती हमलों के बीच वहां और अधिक पाक सैनिकों की जल्द तैनाती पर सहमति जताई है। हालांकि, 11 साल पहले पाकिस्तानी संसद ने हूती संघर्ष से दूर रहने के पक्ष में मतदान किया था।

लेकिन अगस्त में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित 'मक्का रक्षा समझौते' के तहत आसिम मुनीर ने यह फैसला लिया है। मुनीर के इस फैसले के बाद जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान में अब संसद के मुकाबले सेना का प्रभाव और दबदबा बेहद मजबूत हो चुका है।

जिसके चलते सरकार व सेना ने इस संवेदनशील सैन्य तैनाती को 'परिचालनात्मक गोपनीयता' करार देते हुए संसद की मंजूरी को दरकिनार कर दिया है।

2025 में भेजे थे 8,000 सैनिक

रॉयटर्स के अनुसार, मक्का संयुक्त रक्षा समझौता 2025 के सऊदी-पाकिस्तानी समझौते पर आधारित है, जिसके तहत पाकिस्तान ने मई तक सऊदी अरब में लगभग 8,000 सैनिक भेजे थे।

पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय का कहना है कि इस गठबंधन में सभी आवश्यक सरकारी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। हालांकि, मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन प्रक्रियाओं में मंत्रिमंडल या संसद की मंजूरी शामिल थी या नहीं, और सैनिकों की तैनाती से जुड़ी जानकारियों को सैन्य गोपनीयता का विषय करार दिया।

इस पर अटलांटिक काउंसिल में दक्षिण एशिया के वरिष्ठ फेलो माइकल कुगेलमैन ने रॉयटर्स को बताया कि पाकिस्तान इस समय एक अलग दौर से गुजर रहा है, जहां संसद की भूमिका अपेक्षाकृत कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा, 'एक समय ऐसा भी था जब पाकिस्तान की संसद सेना न भेजने के पक्ष में मतदान करती थी और सेना उस फैसले को मानती थी, लेकिन अब वक्त बदल चुका है'

2030 तक बढ़ा मुनीर का कार्यकाल

ज्ञात हो कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख मुनीर को संवैधानिक परिवर्तनों के कारण उन्हें 2030 तक इस पद पर बने रहने की अनुमति मिल गई है, और उन्हें आजीवन फील्ड मार्शल का दर्जा प्राप्त रहेगा।