इस्‍लामाबाद, एएनआइ। आखिरकार, पाकिस्‍तानी सेना ने सोमवार को यह बात कबूल ली कि उसके देश में आतंकियों की मौजूदगी है। इसके साथ ही उसने यह भी कहा कि वह देश में मौजूद हिंसक चरमपंथी और जिहादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। लेकिन, देश से आतंकियों का सफाया करने के लिए अभी भी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है।

इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के महानिदेशक मेजर जनरल आसिफ गफूर ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हमने हिंसक चरमपंथी संगठनों और जिहादी समूहों प्रतिबंधित कर दिया है। हम उनके खिलाफ कार्रवाई भी कर रहे हैं। लेकिन, आतंकवाद के खिलाफ अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है, ताकि इस पर लगाम लगाई जा सके।

मेजर जनरल गफूर ने कहा कि आतंकवाद से अब तक पाकिस्‍तान को लाखों डॉलर का नुकसान हुआ है। पिछली सरकारें आतंकवाद पर लगाम लगाने में नाकाम रहीं और जिसकी वजह से पाकिस्तान को लाखों डॉलर गंवाने पड़े। सरकारें जिहादी समूहों पर मेहरबानी करने में व्‍यस्‍त रहीं, इसलिए हम इन प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ रणनीति नहीं बना सके।

मेजर जनरल गफूर की टिप्पणी उस समय आई है, जब भारत बिल्‍कुल साफ कर चुका है कि इस्लामाबाद के साथ कोई बात तभी होगी जब वह अपनी जमीन से आतंकवादियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करेगा। भारत के रुख में यह तल्‍खी पुलवामा आतंकी हमले के बाद आई है। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद भारत ने पाकिस्‍तान के बालाकोट में मौजूद आतंकी शिविरों पर एयर स्‍ट्राइक की थी।

गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने ईरान के राष्‍ट्रपति हसन रुहानी से मुलाकात के दौरान कहा था कि पाकिस्‍तान की धरती का उपयोग ईरान में आतंकी हमले करवाने में होता रहा है। इस बयान के आते ही पाकिस्‍तान में हंगामा मच गया था। देश की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्‍बानी खार समेत अन्‍य नेताओं ने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि ऐसा पहली बार हुआ है कि देश के किसी प्रधानमंत्री ने दूसरे देश के राष्‍ट्रपति के समक्ष इस तरह का बयान दिया हो। खार ने यहां तक कहा था कि इस बयान से देश का सिर शर्म से झुक गया है।

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