इस्लामाबाद, रायटर। पाकिस्तान और तालिबान ने अमेरिका से शांति वार्ता फिर शुरू करने की अपील की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले माह वार्ता रद कर दी थी। उन्होंने यह कदम ऐसे समय पर उठाया था जब अमेरिका और तालिबान समझौते के करीब पहुंच गए थे।

इस समझौते के तहत अफगानिस्तान से अमेरिकी बलों की वापसी के बदले में तालिबान को क्षेत्रीय सुरक्षा की गारंटी देनी थी। लेकिन काबुल में हुए आतंकी हमले में एक अमेरिकी सैनिक समेत 12 लोगों की मौत के बाद ट्रंप ने वार्ता रद कर दी थी।

एक दिन पहले इस्लामाबाद पहुंचे तालिबान प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने गुरुवार को यहां पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी से मुलाकात की। पाक विदेश मंत्रालय ने इस पर कहा, 'दोनों पक्षों ने शांति प्रक्रिया यथाशीघ्र बहाल किए जाने की जरूरत पर सहमति जताई है।'

अब्दुल गनी बरादर कर रहे नेतृत्व

तालिबान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुल्ला अब्दुल गनी बरादर कर रहे हैं। अफगानिस्तान में अमेरिका के विशेष दूत जालमे खलीलजाद भी इस समय पाकिस्तान की राजधानी में हैं। गत दिसंबर से तालिबान के साथ कतर की राजधानी दोहा में चल रही शांति वार्ता में खलीलजाद ही अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व कर रहे थे। ऐसे में यह कयास लगाया जा रहा है कि तालिबान और अमेरिका के बीच बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है।

पाकिस्तान की भूमिका अहम

अमेरिका लंबे समय से मानता आया है कि अफगानिस्तान में 18 साल से जारी खूनी संघर्ष को खत्म करने में पाकिस्तान की भूमिका अहम हो सकती है। पाकिस्तान को तालिबान का प्रमुख समर्थक माना जाता है।

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