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तालिबान से ज्यादा ताकतवर सेना, फिर भी अफगानिस्तान में जमीनी फौज भेजने से क्यों डर रहा पाकिस्तान?

Published: Thu, 08 Oct 2026 04:39 PM (IST)

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर तनाव बढ़ रहा है, जहाँ पाकिस्तान वायु सेना TTP ठिकानों पर हवाई हमले कर रही है।

अफगानिस्तान में जमीनी हमला करने से बच रहा पाकिस्तान (फोटो-रॉयटर्स)

अफगानिस्तान में जमीनी हमला करने से बच रहा पाकिस्तान (फोटो-रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ सालों में दोनों देशों की सेनाओं और तालिबान लड़ाकों के बीच कई बार हिंसक झड़पें हो चुकी हैं। अक्तूबर 2025 में पाकिस्तानी वायु सेना द्वारा अफगानिस्तान के अंदर तहरीक-एक-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के ठिकानों पर की गई एयर स्ट्राइक के बाद यह संघर्ष नए चरण में पहुंच गया है।

हालांकि सैन्य ताकत के मामले में पाकिस्तान अफगानिस्तान से बहुत आगे है, लेकिन फिर भी पाकिस्तान ने जमीनी हमला करने के बजाय मुख्य रूप से हवाई ताकत का इस्तेमाल करने की नीति अपनाई है।

दोनों देशों में सैन्य ताकतों का भारी असंतुलन

पाकिस्तान की सेना अफगानिस्तान के मुकाबले ज्यादा ताकतवर है। ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स में पाकिस्तान 14वें स्थान पर है और वह परमाणु हथियारों से लैस भी है। इसके विपरीत, अफगानिस्तान इस सूची में 121वें स्थान पर है। तालिबान के पास कोई संगठित वायु सेना नहीं है और उनके लड़ाके मुख्य रूप से अमेरिका व पूर्व अफगान सेना द्वारा छोड़े गए हथियारों और गुरिल्ला युद्ध रणनीति पर निर्भर है।

आज के समय गुरिल्ला युद्ध रणनीति उतनी कारगर नहीं है। वहीं हवाई हमले आधुनिक युग की सैन्य कार्रवाई की अहम रणनीति का हिस्सा हैं। हवाई क्षेत्र में पूर्ण प्रभुत्व होने के कारण पाकिस्तान वायु सेना आसानी से अफगान सीमा में प्रवेश कर TTP के संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाती है और सुरक्षित वापस लौट आती है।

जमीनी हमले से बचने की वजह

पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के भीतर बड़े पैमाने पर जमीनी सेना न भेजने के पीछे कई महत्वपूर्ण रणनीतिक, भौगोलिक और आर्थिक कारण हैं। अफगानिस्तान का अधिकांश भूभाग हिंदूकुश और सफेद कोह जैसी कठिनी और पथरीली पर्वत श्रृंखलाओं से ढका हुआ है। यह इलाका पारंपरिक सेनाओं की आवाजाही के लिए बेहद कठिन है, जबकि गुरिल्ला और असममित युद्ध लड़ने वाले तालिबान के लिए प्राकृतिक ढाल का काम करता है।

ब्रिटेन, सोवियत संघ और अमेरिका जैसी महाशक्तियां भी इस भूगोल के कारण यहां दीर्घकालिक नियंत्रण स्थापित करने में असफल रही हैं।

एयर स्ट्राइक के जरिए सटीक हमले

पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का इसका लेकर कहना है, पाकिस्तान का लक्ष्य अफगानिस्तान के इलाके पर कब्जा करना नहीं है, बल्कि TTP के बुनियादी ढांचे को नष्ट करना है। एयर स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तान जमीनी कब्जे की जिम्मेदारी उठाए बिना सटीक हमले कर सकता है।

वहीं जमीनी सीमा पार करने से यह संघर्ष पूर्ण युद्ध में बदल सकता है। ऐसे में पाकिस्तान पर न केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव बढ़ेगा, बल्कि पाकिस्तान पर वैश्विक प्रतिबंधों का खतरा भी मंडराने लगेगा।

अमेरिका ने 2001 से 2021 के बीच अफगान युद्ध पर लगभग 2.26 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए और 2,461 सैनिक भी मारे गए थे। पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान के लिए एक लंबे जमीनी युद्ध का वित्तीय और लॉजिस्टिकल बोझ उठाना लगभग असंभव है।

बिना कब्जे के दबाव बनाने की रणनीति

हवाई हमले पाकिस्तान को यह सुविधा देते हैं कि वह संघर्ष के स्वरूप को सीमित रखते हुए सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों का जवाब दे सके। इससे पाकिस्तान को अपनी सैन्य उपस्थिति और इरादे दिखाने का मौका मिलता है, बिना इसके कि उसके सैनिक हिट-एंड-रन हमलों में माहिर लड़ाकों के हाथों भारी नुकसान उठाएं।

पाकिस्तान का ध्यान युद्ध को बढ़ाने के बजाय हवाई हमलों के माध्यम से एक सीमित दबाव की स्थिति बनाए रखने पर ही केंद्रित होता ज्यादा दिखाई देता है।