लाहौर (प्रेट्र)। पाकिस्तानी कोर्ट ने सात वर्षीय जैनब के क्रूर बलात्कार और हत्या के आरोपी शख्स की मौत की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है। पाकिस्तान में जनवरी माह में घटी ये घटना के बाद पूरे देश में विरोध की लहर दौड़ गई थी। देश के इतिहास में पहली बार किसी कोर्ट ने चार दिनों में ऐसे मामले की सुनवाई कर अपना फैसला सुना दिया था।

पिछले महीने ही भ्रष्टाचार विरोधी अदालत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए 23 वर्षीय इमरान अली को हत्या, अपहरण, नाबालिग का रेप और नाबालिग के साथ अप्राकृतिक यौनाचार का आरोपी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। लाहौर उच्च न्यायालय ने कल भ्रष्टाचार विरोधी अदालत के फैसले को बरकरार रखा।

अली को जनवरी में उसके अपराध के दो सप्ताह के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था। उसने सात वर्षीय बच्ची का अपहरण कर उसका रेप करने के बाद हत्या कर उसकी बॉडी को कसूर शहर के एक डस्टबिन में डाल दिया था।

इस घटना के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन की बाढ़ आ गई थी। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ऐसी कई मामले निकल कर आए जिनके आरोपियों को खुले तौर पर सजा देने की मांग की गई थी। कोर्ट में पेश एक डीएनए फाइंडिंग रिपोर्ट के आधार पर ये फैसला सुनाया। 

आरोपी अली ने कहा कि कोर्ट किसी भी साक्ष्य पर आंख बंद कर भरोसा नहीं कर सकता है। उसने कहा कि इसलिए उसके साथ अच्छे से व्यवहार किया जाना चाहिए क्योंकि उसने अपना अपराध स्वीकार करके अदालत का समय बचाया था। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद, बेंच ने आरोपी के अपील को खारिज कर दिया और अदालत द्वारा सौंपी गई सजा को बरकरार रखा। अपराधी अब उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है। 

Posted By: Srishti Verma

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