मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

इस्लामाबाद, पेट्र। दुनिया भर में कश्‍मीर को लेकर मानवाधिकारों का राग अलापने वाले पाकिस्‍तान में मानवाधिकारों का बुरा हाल है। वहां बलूचिस्‍तान, खैबरपख्‍तूनख्‍वा में आए मानवाधिकारों के उल्‍लंघन की सूचनाएं मिलतीं रहती हैं। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इसके शीर्ष पदाधिकारियों का कार्यकाल पूरा होने की वजह से तीन महीने से अधिक समय से निष्क्रिय पड़ा है।

सात में से छह सदस्‍यों का कार्यकाल खत्‍म
डॉन अखबार ने एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अध्यक्ष और सात में से छह सदस्यों का चार वर्ष का कार्यकाल गत 30 मई को समाप्त हो चुका है। आयोग के कर्मचारियों को डर है कि प्रधानमंत्री इमरान खान और नेशनल असेंबली में नेता विपक्ष शहबाज शरीफ के बीच कटु संबंधों की वजह से हो सकता है कि आयोग अभी और समय तक निष्क्रिय रहे।

नई नियुक्तियों में लग सकता है छह से सात महीने का समय
हालांकि, मानवाधिकार मंत्रालय के महानिदेशक मोहम्मद अरशद ने कहा कि अध्यक्ष और सदस्यों के पदों पर भर्ती के लिए पुन: विज्ञापन निकाला जाएगा। नियुक्तियों की समूची प्रक्रिया के पूर्ण होने में छह से सात महीने लग सकते हैं। 

यह भी पढ़ें: UNHRC में शाह महमूद कुरैशी के मुंह से निकला सच, जम्मू-कश्मीर को बताया 'भारतीय राज्य', VIDEO

पाकिस्‍तान में पश्‍तूनों पर जुल्‍म की इंतहा 
पाकिस्‍तानी सेना और सरकार के जुल्‍म की वजह से  पिछले एक दशक में हजारों पश्‍तूनों की जान जा चुकी हैं, जबकि हजारों पश्तून बेघर हो चुके हैं। पाकिस्तानी आर्मी और वायुसेना के हमलों की वजह से हजारों पश्तून देश छोड़कर भागने के लिए मजबूर हो गए। करीब 8 हजार पश्तून लोग अब तक लापता हो चुके हैं। हर एक पश्तूनों को पाकिस्तान में शंका की दृष्टि से देखा जाता है। अब हालात ऐसे हैं कि पश्तूनों के लिए पाकिस्तान में सांस लेना तक मुश्किल है। पश्‍तूनों के मान‍वाधिकारों के हनन का कोई नामलेवा नहीं है।   

Posted By: Arun Kumar Singh

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप