लाहौर, आइएएनएस। मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले के मास्टरमाइंड और जमात-उद-दावा (JuD) के प्रमुख हाफिज सईद के साले को पाकिस्तान सरकार की आलोचना करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अब्दुल रहमान मक्की (जो JuD के राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विंग का प्रमुख है और इसके चैरिटी आर्म फलाह-ए-इंसानियत (FiF) के प्रभारी है) को सरकार द्वारा गैर-कानूनी संगठनों पर कार्रवाई के दौरान विरोध के चलते हिरासत में लिया गया।

मक्की पर आरोप है कि उसने पाकिस्तान सरकार द्वारा आतंकवादियों पर उठाए जा रहे कदमों की आलोचना की और सरकार के खिलाफ गुजरांवाला में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। उस पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के दिशा-निर्देशों के तहत कार्रवाई की गई। बता दें कि FATF एक अंतरसरकारी संस्था है जो काले धन को वैध बनाने (मनी लॉन्ड्रिंग) को रोकने से संबंधित नीतियाँ बनाने के लिए बनाई गई थी। सन 2001 में इसका कार्यक्षेत्र विस्तारित किया गया और आतंकवाद को धन मुहैया कराने के विरुद्ध नीतियाँ बनाना भी इसके कार्यक्षेत्र में सम्मिलित कर लिया गया। इसका सचिवालय पेरिस स्थित आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के मुख्यालय में है। बता दें कि टेरर फंडिंग को लेकर अक्सर FATF पाकिस्तान को चेताता रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, मक्की को मेंटनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया और लाहौर की जेल में भेज दिया गया। बता दें कि 2010 में अमेरिका ने इसे नामित भी कर दिया था। भारत की मांग पर अमेरिका ने मक्की को आतंकी घोषित किया था।

बता दें कि गैरकानूनी समूहों पर कार्रवाई को पाकिस्तान सरकार ने इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय कार्य योजना(National Action Plan) के तहत शुरू किया था। मार्च महीने में, राजधानी इस्लामाबाद से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े खातों और संपत्ति को जब्त करने के फरमान जारी किया गया। हफ्तों के भीतर, सरकार ने कहा कि उसने 182 सेमिनारों पर नियंत्रण कर लिया और इनमें सम्मिलित 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है।

11 मई को आंतरिक मंत्रालय ने बताया कि 11 संगठनों के खिलाफ आतंकवाद निरोधी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है, इनमें JuD, FiF और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) भी थे।

बता दें कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद(UNSC) द्वारा JeM प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया था, जिसके बाद अमेरिका ने कहा था कि पाकिस्तानी फौज को 'सही फैसले' लेने की जरूरत है। अजहर को बैन करने के बाद अमेरिका ने उम्मीद जताई थी कि UNSC की इस फैसले से पाकिस्तान में आतंवादियों की जड़ों को खत्म करने में मदद मिलेगी।

ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि लगभग डेढ़ साल पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान की सुरक्षा सहायता में कटौती का आदेश दिया था। उसके बाद से अमेरिका आतंकवादियों को समर्थन देने की पाकिस्तान की नीति में बदलाव लाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के वहां के आतंकी समूहों से संपर्को को जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा कि अमेरिका वहां की आंतरिक राजनीति में नहीं पड़ना चाहता, लेकिन उम्मीद करता है कि पाकिस्तानी सेना हालात को सही करेगी।

अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री खान सही बात कह रहे हैं, वह बदलाव लाने की कोशिश भी कर रहे हैं, लेकिन यह वक्त बताएगा कि वह इसमें कहां तक सफल होते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को भी सही फैसले और सही कदम उठाने होंगे। बता दें कि इमरान खान ने सुरक्षा परिषद के फैसले के बाद आतंकी गुटों पर कार्रवाई करने और कुछ शुरुआत कदम उठाने की बात कही थी।

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Posted By: Nitin Arora