कराची। क्या कोई ठेलेवाला 24 साल में 96 लोगों की हत्या कर सकता है, ये एकबारगी सुनने में थोड़ा अजीब लगता है मगर है सच। दरअसल पाकिस्तान के कराची शहर में एंटी स्ट्रीट क्राइम और सोल्जर बाजार पुलिस ने बुधवार को यहां एक ऐसे ही आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस आरोपित ने 1995 में मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट लंदन की सदस्यता ली थी, उसी के बाद से वो हत्या करने लगा था। इसका नाम यूसुफ उर्फ ठेलेवाला बताया गया है। पाकिस्‍तान के अखबार डॉन के मुताबिक पुलिस ने एक टीटी पिस्तौल, ग्रेनेड और एक मोटरसाइकिल जब्त की है। पुलिस ने जब इससे सख्ती से पूछताछ की तो उसने कई सारे राज बताए।

मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-लंदन का सदस्य 

यूसुफ उर्फ ठेलेवाला मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट का सदस्य है। यूसुफ ने अपने साथियों के साथ सीधे 30 लोगों की हत्या में शामिल रहना स्वीकार किया, इसी के साथ उसने ये भी बताया कि उसने 66 शवों को भी ठिकाने लगाया है। बताया जा रहा है कि जब उसने मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट लंदन की सदस्यता ले ली थी। उसी के बाद से उसने हत्याएं करना शुरू कर दिया था।

एसएसपी ने दी जानकारी 

यूसुफ उर्फ ठेलेवाले को पकड़े जाने के बाद शहर के एसएसपी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, इसमें उन्होंने विस्तार से इसके बारे में सारी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूसुफ ने बताया कि वो डॉ.फारूक सत्तार के संपर्क में था, उनसे संपर्क होने के बाद उसने इस तरह की चीजों को अंजाम देना शुरू किया। जब डॉ.सत्तार से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने यूसुफ नाम के किसी भी व्यक्ति को जानने से इनकार कर दिया।

 

सैन्यकर्मी, वायुसेना अधिकारी व 12 लोगों को मारा 

यूसुफ ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उसने दो सैन्यकर्मी, पाकिस्तान वायु सेना के एक अधिकारी को मार डाला, इसके अलावा 12 ऐसे लोगों की भी हत्या कर दी, इनमें पुलिस मुखबिर, एक पुलिसकर्मी, मोहजीर कौमी आंदोलन के पांच कार्यकर्ता, एक सरकारी कर्मचारी और कई अन्य लोग शामिल थे। उसने खुलासा किया कि उसने अपने अन्य साथियों - नदीम उर्फ ​​मार्बल, रियाज उर्फ ​​चाचा, अज़ीम उर्फ ​​छोटा, रशीद उर्फ ​​छोटा, अब्दुल सलाम के साथ - अपने दो भाइयों, आसिफ और काशिफ को मोमिनाबाद से अपहरण कर लिया और संदेह पर उनकी हत्या कर दी। इनके मुखबिर होने का शक था।

1996 में पहली बार किया गया गिरफ्तार 

एसएसपी ने कहा कि यूसुफ को पहली बार 1996 में रेंजर्स ने गिरफ्तार किया था, लेकिन उसे 1997 में जमानत पर रिहा कर दिया गया। फिर उसे दो व्यक्तियों की हत्या में कथित संलिप्तता के लिए मोमिनबाद पुलिस ने 1998 में गिरफ्तार किया था। इस आरोप में उसने पांच साल जेल में बिताए और 2003 में पैरोल पर रिहा हुआ। उसके बाद से वो छिपी हुई जिंदगी जी रहा था।

उस अवधि के दौरान उसे लंदन में एमक्यूएम नेतृत्व से निर्देश मिला। उन्होंने कहा कि उनकी पैरोल रद्द होने के बाद से गृह विभाग ने यूसुफ की गिरफ्तारी के निर्देश भी जारी किए थे। मगर वो पकड़ में नहीं आ रहा था। उन्होंने बताया कि ठेलेवाले ने जिला पश्चिम में आतंक कायम कर रखा था। इस दौरान उसके कई साथी या तो मारे गए थे या जेल में बंद थे।

डॉ.फारूक सत्तार के संपर्क में था ठेलेवाला 

यूसुफ ने बताया कि वो एमक्यूएम के वरिष्ठ नेता डॉ.फारूक सत्तार के संपर्क में था, उसकी पार्टी मुख्यालय नौ इलेवन में कई बार डॉ.सत्तार से मुलाकात भी हुई है। डॉ.सत्तार ने ही यूसुफ के लिए एक अलग कमरे की व्यवस्था की थी। डॉ.सत्तार ने इस तरह की किसी भी बात से इनकार कर दिया, उनका कहना था कि वो यूसुफ उर्फ ठेलेवाले नामक किसी भी शख्स को नहीं जानते हैं।

उनका कहना था कि वो नहीं जानते कि नौ शून्य या खुर्शीद बेगम हॉल में उनसे मिलने कौन आया था, क्योंकि सैकड़ों लोग वहां अपनी शिकायतें लेकर आए थे। ऐसे किसी भी खास शख्स के बारे में उनको कोई जानकारी नहीं है। डॉ. सत्तार ने कहा कि ये उनके विरोधियों और संदिग्धों द्वारा रची गई साजिश का हिस्सा हो सकता है।  

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