इस्लामाबाद, एपी। अमेरिकी सैनिकों की हत्या के बदले में तालिबानी आतंकियों को इनाम देने की रूसी पेशकश पर जारी विवाद के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने आतंकी संगठन के प्रमुख वार्ताकार से बातचीत की है। हालांकि सोमवार को हुई वार्ता में इन आरोपों पर किसी तरह की चर्चा नहीं की गई। बता दें कि द न्यूयॉर्क टाइम्स ने शनिवार को एक खबर प्रकाशित की थी, जिसमें दावा किया गया था कि अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि लंबे समय से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए शांति वार्ता के बीच रूसी सैन्य खुफिया इकाई ने गुप्त रूप से तालिबान से जुड़े आतंकवादियों को अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों सहित गठबंधन सेनाओं को निशाना बनाने पर इनाम देने की पेशकश कर रही है।

पोंपियो ने विद्रोहियों से अफगानिस्तान में हिंसा कम करने पर दिया जोर

तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शहीन ने ट्वीट किया कि पोंपियो और मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने सोमवार रात वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बात की। इस दौरान पोंपियो ने विद्रोहियों से अफगानिस्तान में हिंसा कम करने पर जोर दिया और फरवरी में अमेरिका और तालिबान के बीच हुए शांति समझौते को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। इन दोनों के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब अफगानिस्तान के लिए अमेरिका के विशेष दूत जालमय खलीलजाद समझौते को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं।

पोंपियो एक जुलाई को इस्लामाबाद पहुंचेंगे, दोहा भी जाएंगे

वह मंगलवार सुबह उजबेकिस्तान में थे और बुधवार को उनके पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचने की संभावना है। वह कतर की राजधानी दोहा भी जाएंगे, जहां तालिबान का राजनीतिक कार्यालय है। शाहीन ने ट्वीट में कहा कि पोंपियो और बरादर ने समझौते के क्रियान्वयन, विदेशी सैनिकों की वापसी, कैदियों की रिहाई, अंतर-अफगानिस्तान वार्ता शुरू करने और सैन्य अभियानों को कम करने पर चर्चा की। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है।

वर्ष 2019 की शुरुआत से थी व्हाइट हाउस के अफसरों को जानकारी

खुफिया मामलों से जुड़े अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि वर्ष 2019 की शुरुआत से ही व्हाइट हाउस के शीर्ष अधिकारियों को पता था कि रूस अफगानिस्तान में अमेरिका और नाटो सैनिकों की हत्या के बदले में उन्हें इनाम देने की पेशकश कर रहा है। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस की एक पड़ताल में पता चला है कि नियमित इंटेलिजेंस ब्रीफिंग के दौरान एक बार राष्ट्रपति ट्रंप को भी इस बारे में जानकारी दी गई थी। उस समय के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने अपने सहयोगियों को बताया था कि उन्होंने ट्रंप को मार्च 2019 में खुफिया सूचना के बारे में जानकारी दी थी।

खुफिया सूचना की सत्यता की पुष्टि नहीं होने से ट्रंप को कोई जानकारी नहीं दी गई थी

हालांकि व्हाइट हाउस ने कहा है कि खुफिया सूचना की सत्यता की पुष्टि नहीं होने से इस संबंध में ट्रंप को कोई जानकारी नहीं दी गई थी। सोमवार को बोल्टन ने ट्रंप को जानकारी देने के बारे में तो कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन एनबीसी चैनल से बात करते हुए इतना जरूर कहा कि ट्रंप इसलिए रूस उकसावे की अनदेखी कर रहे हैं, क्योंकि कोई उनसे इस संबंध में सवाल नहीं पूछ सके।

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस