खतरे में शहबाज शरीफ की कुर्सी? खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी, इस्लामाबाद की सीमाएं सील
पाकिस्तान में शहबाज शरीफ सरकार ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू कर दिया है, जिससे इमरान खान की पार्टी पीटीआई की प्रांतीय सरकार भंग हो गई है।

खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल (फोटो- रॉयटर्स)
HighLights
खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू, प्रांतीय सरकार भंग।
पीटीआई ने इसे लोकतंत्र पर हमला, तख्तापलट बताया।
इस्लामाबाद की सीमाएं सील, राजनीतिक टकराव बढ़ा।
डिजिटल डेस्क, इस्लामाबाद। पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार की सिफारिश और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की मंजूरी के बाद, जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (पीटीआइ) के शासन वाले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आपातकाल लागू कर दिया गया है।
इस संवैधानिक कदम के बाद प्रांतीय सरकार का वजूद फिलहाल खत्म हो गया है और अब छह महीने के लिए राज्य की कमान गवर्नर और सलाहकार परिषद के हाथों में सौंप दी गई है।
संघीय सरकार और सेना का आरोप है कि इमरान खान की पार्टी खैबर पख्तूनख्वा में इस्लामिक आतंकवाद को रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है, जिससे सूबे में लगातार हिंसक हमले बढ़ रहे हैं। इसके विपरीत, पीटीआइ ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला और "आपातकाल के रूप में छिपा हुआ तख्तापलट" करार दिया है।
पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार ने आतंकवाद से मुकाबले के लिए कभी जरूरी फंड और हथियार मुहैया नहीं कराए। पीटीआइ प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने कहा, "यह लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है; आपातकाल की आड़ में किया गया तख्तापलट है।"
आदेश के सामने आने के बाद सड़कों पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। बारा मार्केट और पेशावर की ओर मार्च करते हुए प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि वे जनता के वोटों के अपमान और इस अलोकतांत्रिक फैसले को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की गतिविधियों पर भी प्रशासनिक पाबंदियां लगा दी गई हैं और उनके कार्यालय के रास्तों को कंटेनर लगाकर सील कर दिया गया है।
दूसरी ओर, इस्लामाबाद की ओर पीटीआइ के संभावित मार्च को रोकने के लिए राजधानी की सभी सीमाओं को सील कर भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। अमेरिका के पूर्व विशेष प्रतिनिधि खलीलजाद ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताते हुए चेतावनी दी है कि निर्वाचित प्रांतीय सरकार को इस तरह बर्खास्त किया जाना पाकिस्तान में हिंसा और अस्थिरता के एक नए दौर को जन्म दे सकता है।
महंगाई, ईंधन के बढ़ते दामों और इमरान खान की सेहत को लेकर पहले से सुलग रहे पाकिस्तान में यह ताजा घटनाक्रम हालात को और अधिक विस्फोटक बना सकता है। देश की 24 करोड़ जनता के बीच राजनीतिक टकराव का यह नया अध्याय आने वाले दिनों में गृह युद्ध जैसे हालात पैदा कर सकता है। (समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)
