इस्लामाबाद, एजेंसी। मीडिया पर प्रतिबंध लगाकर उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही पाकिस्तान की इमरान सरकार को इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने पाकिस्तान टेलीकम्यूनिकेशन अथॉरिटी (पीटीए) को सोशल मीडिया के लिए बनाए गए नियमों को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि अदालतों ने सरकार को मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति कभी नहीं दी है। कोर्ट मीडिया की आवाज बंद नहीं होने देगा। 

अदालत ने दागे सवाल

मीडिया के सिद्धांत और नियमों से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अतहर मिनल्लाह ने कहा कि रचनात्मक आलोचना राष्ट्र निर्माण की पूर्व निर्धारित शर्त है। चीफ जस्टिस ने पूछा कि आखिर किसी भी व्यक्ति को आलोचना से क्यों डरना चाहिए ? दरअसल, पाकिस्तान के प्रख्यात पत्रकार हामिद मीर ने कोर्ट को बताया था कि सरकार ने सोशल मीडिया को नियमबद्ध करने के लिए एक अधिसूचना जारी की है। जबकि केंद्र सरकार के मंत्री इससे पूरी तरह अनभिज्ञ थे। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया था कि इस अधिसूचना पर केंद्रीय मंत्रिमंडल में किसी प्रकार की कोई चर्चा नहीं हुई।

मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित

पीटीए और पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण (पीईएमआरए) के प्रतिनिधियों ने कोर्ट को सूचित किया कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बाद प्रधानमंत्री इमरान खान ने बनाए गए नियमों की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया है। यह नियम अब तक लागू नहीं हुए हैं। इस पर न्यायमूर्ति मिनल्लाह ने पीटीए और पीईएमआरए के प्रतिनिधियों को बनाए गए नियमों को अदालत में पेश करने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। सोशल मीडिया के लिए बनाए गए नियमों को चुनौती देने वाले बैरिस्टर जहांगीर जदून ने अदालत को जंग ग्रुप के प्रधान संपादक को गिरफ्तार करने और केबल ऑपरेटरों को जियो न्यूज का प्रसारण नहीं करने जैसे आदेशों से भी अवगत कराया। 

Posted By: Ramesh Mishra

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