इस्लामाबाद, प्रेट्र। पाकिस्तान की सरकार ने बुधवार को एक विशेष अदालत को बताया कि इंटरपोल ने पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ को गिरफ्तार करने का आग्रह ठुकरा दिया है। इंटरपोल का कहना है कि वह सियासी मामलों में नहीं पड़ना चाहता। अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन से देशद्रोह मामले में मुशर्रफ की गिरफ्तारी का आग्रह किया गया था। मुशर्रफ पर यह मामला साल 2007 में पाकिस्तान पर आपातकाल थोपने के लिए चलाया जा रहा है। वह इस समय दुबई में रह रहे हैं।

इस्लामाबाद की विशेष अदालत में मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह मामले की सुनवाई फिर से शुरू होने पर सरकार ने यह जवाब दाखिल किया। गृह मंत्रालय ने कोर्ट को बताया कि 72 वर्षीय मुशर्रफ को मुल्क वापस लाने के प्रयास के तहत इंटरपोल से रेड कार्नर नोटिस जारी करने का आग्रह किया गया था, लेकिन इंटरपोल ने इस जवाब के साथ पत्र को लौटा दिया कि वह राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा।

विशेष अदालत ने मुशर्रफ की गिरफ्तारी नहीं होने पर 20 अगस्त को गृह सचिव को समन भेजा था। इसमें पूछा गया था कि कई बार गैर जमानती वारंट जारी होने के बावजूद मुशर्रफ की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?

पाकिस्तान में इमरजेंसी के दोषी साबित हुए थे मुशर्रफ
आपको बता दें कि 74 वर्षीय परवेज मुशर्रफ को साल 2007 में देश में आपातकाल लगाने के लिए मार्च 2014 में राष्ट्रद्रोह के आरोपों में दोषी करार दिया गया था। देश में आपातकाल लगाने के बाद कई वरिष्ठ न्यायाधीशों को उनके घरों में नजरबंद कर दिया गया था और 100 से अधिक जजों को बर्खास्त कर दिया गया था।

पाकिस्तान की विशेष अदालत ने भगोड़ा घोषित किया 
मुशर्रफ 18 मार्च, 2016 को इलाज के लिए दुबई चले गए थे। कुछ महीने बाद विशेष अदालत ने उन्हें भगोड़ा अपराधी घोषित कर दिया था। साथ ही अदालत में पेश नहीं होने के कारण उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश भी दिया था। अदालत ने मार्च में आदेश दिया था कि संघीय सरकार उनके राष्ट्रीय पहचान पत्र और पासपोर्ट को निलंबित कर दे।

Posted By: Ravindra Pratap Sing