जेनेवा, प्रेट्र। भारत ने पाकिस्तान को आतंकवाद का केंद्र बताते हुए कहा कि उसे मानवाधिकारों पर भाषण देने का कोई अधिकार नहीं है। वहां अल्पसंख्यक हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों पर बेहिसाब जुल्म किए जा रहे हैं। भारत ने पाकिस्तान का साथ देने वाले तुर्की को भी नसीहत दी कि भारत के मामले में टांग अड़ाने की बजाय वह अपने यहां लोकतंत्र का हाल देखे।

जेनेवा में मानव अधिकार परिषद (एचआरसी) की बैठक में पाकिस्तान सोमवार को अपना पक्ष रख चुका था। अब भारत की बारी थी। भारत के प्रतिनिधि पवन कुमार ने कहा, 'पाकिस्तान को झूठ बोलने की आदत पड़ गई है। वह तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करता है। भारत की छवि धूमिल करने का उसका कोई भी प्रयास सफल नहीं होगा।

जो देश आतंकवाद का गढ़ हो, जहां धार्मिक अल्पसंख्यकों पर जुल्म किए जा रहे हों, वह किस मुंह से मानवाधिकारों पर भाषण देगा। दुनिया जानती है कि जिन आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित किया, उन्हें पाकिस्तान पेंशन देता है। पाकिस्तान के एक प्रधानमंत्री ने खुद गर्व से कुबूल किया था कि उनके देश ने जम्मू-कश्मीर में लड़ने के लिए हजारों आतंकियों को ट्रेनिंग दी।'

वैश्विक संस्थाएं भी चिंतित

भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि यह कोई आश्चर्य की बात नहीं कि वैश्विक संस्थाओं ने भी आतंकी फंडिंग रोकने में पाकिस्तान की विफलता और आतंकी संगठनों के खिलाफ उसके द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं करने को लेकर चिंता जाहिर की है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ ईशनिंदा, जबरन धर्म परिवर्तन, सुनियोजित हत्या, सांप्रदायिक ¨हसा और धार्मिक भेदभाव जैसे अमानवीय बर्ताव होते हैं। पाकिस्तान में हिंदू, सिख व ईसाई समुदाय की महिलाओं और लड़कियों का हजारों की संख्या में अपहरण, धर्म परिवर्तन और जबरिया शादी आम बात है।

आजाद घूमते हैं हत्यारे

बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध के हालात का जिक्र करते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि बलूचिस्तान में ऐसा कोई दिन नहीं जाता, जब सुरक्षाबलों के जवान किसी को उठा कर नहीं ले जाते। पाकिस्तान की सरकारी मशीनरी खुद पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक असंतुष्टों पर हमला कराती है। यह अकारण नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पाकिस्तान को एक ऐसे देश के रूप में चिह्नित किया है, जहां पत्रकार मारे जाते हैं और हत्यारे आजाद घूमते हैं।

ओआइसी को सलाह

भारत ने तुर्की को भी सलाह दी कि वह भारत के अंदरुनी मामलों पर टिप्पणी करने से बचे और अपने यहां लोकतंत्र की समझ बेहतर करे। भारत ने जम्मू-कश्मीर के बारे में इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआइसी) के वक्तव्य को खारिज करते हुए कहा कि यह भारत का अटूट अंग है। भारत के अंदरुनी मामले में दखल देने का ओआइसी को कोई अधिकार नहीं है। पाकिस्तान अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए इस संगठन का दुरुपयोग करता है। संगठन के सदस्यों को खुद सोचना चाहिए कि क्या यह उनके हित में है।

इंडियन टी20 लीग

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस