लाहौर, प्रेट्र। करतारपुर साहिब कॉरीडोर बनाने के बड़े फैसले के बाद पाकिस्तान सरकार ने भारत से आने वाले लोगों के लिए सीमा पर इमीग्रेशन सेंटर स्थापित कर दिया है। कॉरीडोर बनाने के कार्य का शुभारंभ करने के चंद रोज बाद ही पाकिस्तान द्वारा इमीग्रेशन सेंटर स्थापना सद्भावना का संकेत मानी जा रही है। चीन ने भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में जमी बर्फ के पिघलने का स्वागत किया है। कहा है- करतारपुर साहिब कॉरीडोर दोनों देशों के संबंध मजबूत करने का बड़ा जरिया बन सकता है।

करतारपुर साहिब कॉरीडोर पाकिस्तान स्थित सिख धर्म के प्रणेता गुरु नानकदेव का अंतिम पड़ाव बने गुरुद्वारे को भारत के गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नानक धाम से जोड़ेगा। दोनों ही स्थानों का सिखों के लिए बड़ा महत्व है। करतारपुर साहिब स्थित गुरुद्वारा भारतीय सीमा से चंद किलोमीटर की दूरी पर है, दूरबीन के जरिये उसे भारत से देखा जा सकता है।

इस गुरुद्वारे के लिए रास्ता खोले जाने की सिखों की मांग काफी पुरानी है। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एफआइए) के डिप्टी डायरेक्टर मुफखार अदील के अनुसार आतंकी, मानव तस्कर और नशीले पदार्थो का धंधा करने वाले इस कॉरीडोर का इस्तेमाल न करने पाएं, इसलिए अभी से सावधानी बरते जाने की जरूरत है। इसी के चलते इमीग्रेशन सेंटर बनाया गया है।

यहां पर भारत से आने वाले सिख श्रद्धालुओं की पहचान से संबंधित कागजात देखे जाएंगे। उनके अंगुलियों के निशान भी लिए जाएंगे। इस कॉरीडोर के जरिये पाकिस्तान आने वालों को केवल शहर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी और वे गुरुद्वारा दरबार साहिब ही जा सकेंगे।

28 नवंबर को ही प्रधानमंत्री इमरान खान ने करतारपुर कॉरीडोर की आधारशिला रखी है। इस मौके पर इमरान ने भारत के साथ अच्छे संबंधों की वकालत की थी। इससे पहले 26 नवंबर को भारत के पंजाब स्थित गुरदासपुर में उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कॉरीडोर के लिए नींव का पत्थर रखा था।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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