मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

इस्लामाबाद, प्रेट्र। पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने गुरुवार को कहा कि ऐतिहासिक करतारपुर गलियारे के शिलान्यास कार्यक्रम में भारत सरकार की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक 'गुगली' फेंकी। कुरैशी की यह टिप्पणी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के एक दिन पहले दिए गए बयान पर आई है।

भारत की विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता फिर से शुरू करने की संभावना को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पाकिस्तान जब तक भारत के खिलाफ सीमा-पार से अंजाम दी जाने वाली आतंकवादी गतिविधियों को नहीं रोकता तब तक बातचीत संभव नहीं है।

पाकिस्तान ने बुधवार के कार्यक्रम में स्वराज को भी आमंत्रित किया था लेकिन स्वराज ने पूर्व प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए आने में असमर्थता जताई थी। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्रियों हरसिमरत कौर बादल और हरदीप सिंह पुरी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

कुरैशी ने कहा कि करतारपुर सीमा का खुलना खान की सरकार की एक 'बड़ी उपलब्धि' है। गुरुवार को खान की सरकार ने 100 दिन पूरे कर लिए।

पाक को अपनी छवि सुधार को मौका
पाकिस्‍तान के लिए करतारपुर कॉरिडोर का मुद्दा अपनी छवि में 'कुछ सुधार' करने का मौका था, जिसे उसने लपक कर पकड़ लिया। हालांकि करतारपुर कॉरिडोर के लिए भारत ने लगभग बीस साल पहले ही प्रस्ताव दिया था। विश्‍व में पाक की स्थिति आज क्‍या है, इससे कोई अंजान नहीं है। आतंकवाद को बढ़ावा देने और टेरर फंडिंग पर लगाम न लगा पाने की वजह से पाकिस्तान आज अलग-थलग पड़ा हुआ है।

ऐसा लगता है कि मौजूदा एकाकीपन से छुटकारा पाने की छटपटाहट में उसने करतारपुर कॉरिडोर के लिए हामी भरी है। इसके अलावा, पाकिस्तान को लगता है कि इससे गुरुद्वारा दरबार साहिब का दर्शन करने आने वाले भारतीय सिख श्रद्धालुओं में कट्टरता भरने, उन्हें रैडिकलाइज करने का उसे मौका मिलेगा।

पाक की नापाक साजिश आई सामने
करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास पर इमरान खान ने दुनिया को दिखाने के लिए बेहद मीठी-मीठी बातें की थीं।दोस्ती और अमन-शांति का खोखला वादा किया था, लेकिन उन्ही के विदेश मंत्री ने उन्हीं के सामने उन्हीं को बेनकाब कर दिया। इस तरह तो कह सकते हैं कि इमरान खान ने करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास के पाक मौके पर दोस्ती का दोगला राग अलापा था।

भारत के दुश्मन को बनाया मेहमान
इमरान खान इतिहास भुलाकर नए रिश्ते की नींव रखने की बात तो कर रहे थे, लेकिन इसके सबके पीछे पाकिस्तान के असली इरादे कुछ और ही थे। वैसे पाकिस्तान और इमरान की नियत पर उसी वक्त सवाल उठ गए थे जब इमरान के सरकारी कार्यक्रम में भारत के दुश्मन गोपाल सिंह चावला को मेहमान बनाया गया था।  वहीं गोपाल सिंह चावला जो आतंकी हाफिज सईद का करीबी है। वहीं गोपाल सिंह चावला जो पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का महासचिव है और भारत के टुकड़े करके खालिस्तान बनाना चाहता है।

भारत का ये दुश्मन दोस्ती का ढोंग करने वाले इमरान का महमान था, लेकिन इसके बावजूद अगर पाकिस्तान की कायराना साज़िश पर कोई शक रह गया हो तो उसे पाकिस्तान के ही विदेश मंत्री ने खत्म कर दिया। एक बार फिर शाह महमूद कुरैशी का वो नापाक बयान आया जिससे पाकिस्तान बेनकाब हो रहा है।

सावधान रहने की जरूरत
शाह महमूद कुरैशी के इस सनसनीखेज बयान से एक बात साफ है कि पाकिस्तान, हिंदुस्तान के साथ अब तक का खतरनाक खेल खेल रहा है। ये कहना गलत नहीं होगा कि इमरान खान की मीठी छुरी भारत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। आतंकियों के सरगना आतंकियों के दोस्त और आतंकियों के सरपरस्त के साथ खड़े होकर अमन की बात करने वाले इमरान से हिंदुस्तान को हर कदम पर सावधान रहने की जरूरत है।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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