इस्लामाबाद, एजेंसी। IHC(इस्लामाबाद उच्च न्यायालय) ने बुधवार को एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पूर्व पूर्व सैन्‍य शासक परवेज मुशर्रफ के खिलाफ आतंकवाद के आरोपों को हटाने और आतंकवाद निरोधी अदालत (एटीसी) से मामले को सेशंन कोर्ट स्थानांतरण करने के लिए कहा गया था। बता दें कि मुख्य न्यायाधीश अथर मिनल्लाह और न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगज़ेब की एक डिवीजन बेंच ने जनरल मुशर्रफ द्वारा अपने वकील अख्तर शाह के माध्यम से दायर याचिका की सुनवाई फिर से शुरू की थी। हालांकि, पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान शाह की बार-बार अनुपस्थिति के कारण याचिका को खारिज कर दिया।

डॉन अखबार के अनुसार,  पूर्व सैन्य शासक आतंकवाद के आरोपों को हटाने और बाद में एटीसी से सेशन कोर्ट में उनके मामले को इसलिए स्थानांतरित करने की मांग कर रहा है क्योंकि शुरू में उसके खिलाफ पाकिस्तान दंड संहिता के तहत पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) 2007 को आपातकाल लगाने के बाद श्रेष्ठ न्यायपालिका के 60 न्यायाधीशों को हिरासत के संबंध में दर्ज की गई थी। हालांकि, 2013 में, IHC की एक एकल-सदस्यीय बेंच ने पुलिस को आदेश दिया था कि न्यायाधीशों को हिरासत में लेने के बाद से सैन्य तानाशाह के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून लागू किया जाए।

एटीसी ने पहले ही जनरल मुशर्रफ को न्यायाधीशों के नजरबंदी मामले में अपराधी घोषित कर दिया था। वह मार्च 2016 से विदेश में है। बता दें कि परवेज मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मामला भी चल रहा है। इस मामले में 24 अक्टूबर से रोजाना सुनवाई होगी। यह निर्णय विशेष अदालत ने लिया है। इस अदालत में यह मामला दिसंबर, 2013 से लंबित है। नवंबर, 2007 में पाकिस्तान पर आपातकाल थोपने के आरोप में 2013 में तत्कालीन नवाज शरीफ सरकार ने मुशर्रफ के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया था। मामले में घिरते देख इलाज के बहाने मुशर्रफ 18 मार्च, 2016 को दुबई चले गए थे। तब से वह अपने मुल्क नहीं लौटे।

Posted By: Nitin Arora

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप