लाहौर, पीटीआइ। पाकिस्तान ने पिछले महीने आतंकी फंडिंग के अंतरराष्ट्रीय निगरानी संगठन फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की काली सूची में जाने से बचने के लिए मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड आतंकी हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध लगाने का जो नाटक रचा था, उसकी पोल खुल गई है। हाफिज सईद और उसके अन्य आतंकी साथी और प्रतिबंधित फलाह-आइ-इंसानियत (एफआइएफ) के दफ्तर पाकिस्तान में खुले आम चल रहे हैं। उसके कामकाज पर पाकिस्तान के लगाए प्रतिबंध का कोई असर नहीं पड़ा है।

गौरतलब है कि पिछले महीने ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने 1997 के आतंकवाद रोधी अधिनियम में संशोधन के लिए अधिनियम बनाया था। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रतिबंधित संगठनों को पाकिस्तान में प्रतिबंधित किया जाना था। तब पाकिस्तान सरकार ने दावा किया था कि उसने जमात-उद-दावा के लाहौर के चौबुर्जी स्थित मस्जिद अल कदीसिया के दफ्तर और मुख्यालय मुरिदके मरकज को बंद कर दिया है। लेकिन हकीकत यह है कि हाफिज सईद और उसके समर्थकों ने ना तो चौबुर्जी मुख्यालय छोड़ा है और ना ही जमात के अन्य दफ्तरों और पाकिस्तान में एफआइएफ के ही कोई भी दफ्तर बंद हुए हैं।

पाकिस्तान की पंजाब प्रांत की सरकार के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि पिछले महीने के मध्य में सरकार ने जमात-उद-दावा के मुख्यालय को अपने कब्जे में ले लिया था। तब से हाफिज सईद ने बड़े पैमाने पर अपने समर्थकों की मौजूदगी में वहां पर तीन शुक्रवार को अपने भाषण दिये हैं। सरकार केवल अल कदीसिया पर अपना प्रशासक ही नियुक्त कर पाई है। जमात उद दावा के लोग वहां वैसे ही काम कर रहे हैं जैसे पहले करते थे। उन्होंने बताया कि जमात के मुरीदके मुख्यालय पर भी यही व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान सरकार ने सईद और उनके अन्य कार्यकर्ताओं को लाहौर में उनका मुख्यालय और मुरीदके को इस्तेमाल करने से नहीं रोका है। इसके अलावा, दोनों प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के अन्य दफ्तरों पर भी ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है।

ज्ञात हो कि पिछले महीने फरवरी में पेरिस में हुई एफएटीएफ बैठक में पाकिस्तान को हाफिज सईद और उसके साथियों पर सबसे पहले कार्रवाई करने को कहा गया था। इसके एवज में ही पाकिस्तान को काली सूची में डालने से पहले जून यानी अगली बैठक तक की मोहलत दी गई थी।

Posted By: Tilak Raj

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