नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। पाकिस्‍तान में आज कुछ ऐसा हुआ जिसको सुनकर अमे‍रिका जरूर हैरान हुआ होगा। हैरान इसलिए क्‍योंकि जिस आतंकी की जानकारी देने के लिए अमेरिका ने 20 लाख का इनाम घोषित किया था आज उसको अचानक से गिरफ्तार कर लिया गया। इसमें हैरानी की बात ये है कि मक्‍की वर्षों से पाकिस्‍तान में खुला घूम रहा था। भारत के खिलाफ जिस तरह से उसका जीजा हाफिज सईद आग उगलता है और लगातार भारत पर हमला करने की बात करता है ठीक उसी तर्ज पर मक्‍की भी भाषणबाजी करता था। लेकिन जब तक वह भारत के खिलाफ आग उगल रहा था तब तक ठीक था, लेकिन जैसे ही उसने पाकिस्‍तान के खिलाफ बोलना शुरू किया उसको तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। अमेरिका के लिए दूसरी हैरानी की बात ये भी है कि पाकिस्‍तान की इमरान खान सरकार और इससे पूर्व की सरकारों को भी मक्‍की के बारे में सभी जानकारी थी, लेकिन कभी किसी ने उसको गिरफ्तार कर अमेरिका को सौंपने की जहमत नहीं भी नहीं उठाई।

आपको बता दें कि मक्‍की एक गुर्जर परिवार से ताल्‍लुक रखता है और हाफिज सईद के आतंकी संगठन जमात उद दावा समेत पाकिस्‍तान इस्‍लामिक वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन अहल-ए-हदीथ समेत लश्‍कर ए तैयबा में वह दूसरे नंबर पर आता है। हाफिज की तरह वह भी पाकिस्‍तान में इस्‍लामिक रूल लागू करवाने का पक्षधर है।गौरतलब है कि मक्‍की को पाकिस्‍तान सरकार के उस कार्रवाई का विरोध करने पर गिरफ्तार किया गया है जिसके तहत सरकार प्रतिबंधित आतंकी संगठन पर शिकंजा कस रही है। उसको गुजरांवाला से गिरफ्तार किया गया और अब लाहौर जेल में शिफ्ट किया गया है। पाकिस्‍तान के समा टीवी के मुताबिक उसको Maintenance of Public Order Act के तहत गिरफ्तार किया है। अपने भाषण में उसने एफएटीएफ की भी आलोचना की और प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात उद दावा के लिए ज्‍यादा से ज्‍यादा चंदा देने की अपील की।

भारत की अपील पर अमे‍रिका ने उसको आतं‍की सूची में डाला था और रिवार्ड फॉर जस्टिस प्रोग्राम के तहत उस पर इनाम घोषित किया था। मक्‍की की पहचान यहीं पर खत्‍म नहीं हो जाती है। वह तालिबान के सुप्रीम कमांडर मुल्‍लाह उमर और अल कायदा के प्रमुख अल जवाहरी का भी करीबी है। मक्‍की को पाकिस्‍तान में भारत विरोधी भाषणों के लिए जाना जाता है और पसंद भी किया जाता है।

यहां पर आपको बता दें कि 13 फरवरी 2010 को जब पुणे की जर्मन बेकरी में धमाका हुआ था उससे आठ दिन पहले उसने मुजफ्फराबाद में भारत को दहलाने संबंधित भाषण खुलेआम दिया था। लेकिन पाकिस्‍तान सरकार उस भाषण को अपनी आदत के अनुसार अनसुना कर गई थी। इसमें उसने साफतौर पर पुणे समेत तीन जगहों पर धमाके करवाने की बात कही थी। मक्‍की वर्तमान में दफा ए पाकिस्‍तान काउंसिल जो कि हाफिज का मुखौटा बदलदने के लिए बनाई गई संस्‍था है, के लिए काम कर रहा था। पाकिस्‍तान के वजरीस्‍तान में अमेरिकी ड्रोन हमले को लेकर वह खुलेआम अमे‍रिका को धमकी दे चुका है। इसके अलावा अफगानिस्‍तान में आतंकियों के ठिकाने पर अमेरिकी बमबारी को लेकर भी उसने कई बार अमेरिका को बदला लेने की धमकी दी है। इतना ही नहीं वह पाकिस्‍तान सरकार को नाटो की सप्‍लाई के लिए हां कहने पर भी नाराजगी जाहिर कर चुका है।

उसके भाषणों में अक्‍सर वॉर ऑन टेरर को लेकर अमे‍रिका को आड़े हाथों लिया जाता रहा है। उसका कहना है कि इसके चलते अमेरिका ने अफगानिस्‍तान, इराक और पाकिस्‍तान में हजारों का खून बहाया है। इसके अलावा वह अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करता आया है। मीडिया के जरिए उसने खुलेआम भारत को भी आरोपों को साबित करने की चुनौती दी है। जहां तक पाकिस्‍तान की बात है तो वह एक बार नहीं बल्कि कई बार क्‍लीन चिट दे चुका है। जिस वक्‍त हिना रब्‍बानी खान पाकिस्‍तान की विदेश मंत्री थीं उस वक्‍त उन्‍होंने कहा था कि मक्‍की और उसके जीजा हाफिज सईद पर कार्रवाई करने के लिए उन्‍हें ठोस सुबूत चाहिए। इसके बिना पाकिस्‍तान कुछ नहीं करेगा। यह बात अलग है कि भारत ने इन दोनों आतंकियों के खिलाफ एक नहीं कई बार ठोस सुबूतों के साथ डोजियर सौंपा है, लेकिन पाकिस्‍तान का रवैया इनको लेकर कभी नहीं बदला।

 

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Posted By: Kamal Verma

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