लाहौर, पीटीआई। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में जैश-ए-मुहम्मद (JeM) सरगना अजहर मसूद के वैश्विक आतंकी (Global Terrorist) घोषित होते ही पाकिस्तान और चीन के रिश्तों में खटास पड़ने लगी है। चीन की वजह से अजहर मसूद लंबे अर्से से बचता चला आ रहा था। चीन ने UNSC में चार बार वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर अजहर मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित होने से रोक दिया था। इस बार अंतरराष्ट्रीय दबाव और पुलवामा आतंकी हमले (Pulwama Terror Attack) में मसूद के खिलाफ पुख्ता सबूत होने की वजह से चीन उसे बचा नहीं पाया।

बताया जा रहा है कि मसूद के वैश्विक आतंकी घोषित होते ही पाकिस्तान और चीन के रिश्तों में पहले जैसी गर्माहट नहीं रही। यही वजह है कि पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने सोमवार को एक महिला समेत आठ चाइनीज नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया है। इन पर मानव तस्करी (Human Trafficking) का आरोप है। आरोप है कि गिरफ्तार नागरिक पाकिस्तान से लड़कियों को तस्करी कर चीन ले जाते हैं। इसके लिए पाकिस्तानी लड़कियों से फर्जी शादी का कांट्रेक्ट किया जाता है और इसके बाद चीन ले जाकर उन्हें देह व्यापार (Flesh Trade) के धंधे में धकेल दिया जाता है।

पिछले सप्ताह भी FIA ने दो चाइनीज नागरिकों को गिरप्तार किया था। इन्हें लाहौर से करीब 150 किमी दूर फैसलाबाद में एक शादी समारोह से गिरफ्तार किया गया था। पाक एजेंसी FIA के पंजाब निदेशक तारिक रुस्तम ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि सोमवार को एक चाइनीज महिला और सात चाइनीज पुरुषों को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग मानव तस्करी में शामिल हैं और पाकिस्तानी लड़कियों को चीन ले जाकर उनसे देह व्यापार कराते हैं। FIA अधिकारियों ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि चाइनीज नागरिक पाकिस्तान से अंग तस्करी और मानव तस्करी कर रहे हैं। ये लोग ज्यादातर पाकिस्तान में रह रही अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय की लड़कियों से शादी करते हैं। इसके बाद उन्हें चीन ले जाकर उनसे जबरन देह व्यापार कराते हैं।

FIA अधिकारी तारिक रुस्तम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का कैनेडिस सरगना भी शामिल है। वह पिछले एक साल से लाहौर एयरपोर्ट के पास रह रहा था। गिरोह पाकिस्तानी लड़कियों को पहले लाहौर में किराए के घरों में रखता था। वहां उन्हें चाइनीज भाषा सिखाई जाती है। यहीं पर उसके शादी संबंधी फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। इसके बाद उन्हें चीन ले जाया जाता है और अनैतिक व्यापार में धकेल दिया जाता है।

पाकिस्तानी अधिकारी ने कि वह लोग पिछले कुछ वर्षों में चाइना में तस्करी कर ले जाई गई लड़कियों की तस्करी का आंकड़ा एकत्र कर रहे हैं। इनकी संख्या सैकड़ों में हो सकती है। इस संबंध में पाकिस्तानी एजेंसी गिरफ्तार चाइनीज नागरिकों से भी पूछताछ कर रही है। एजेंसी ने आशंका व्यक्त की है कि गिरफ्तार सभी नागरिक भी लड़कियों की तस्करी में शामिल हो सकते हैं।

पाकिस्तानी सरकार ने हाल में ही एफआईए को पाकिस्तानी लड़कियों की तस्करी करने वाले चाइनीज गिरोहों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट के गरीब ईसाई लड़कियां पैसों और बेहतर जीवन के लालच में इन गिरोहों के झांसे में फंस जाती हैं। पाकिस्तान में चल रहे फर्जी मैच मेकिंग सेंटर के जरिए इन लड़कियों को झांसे में लिया जाता है। यही मैच मेकिंग सेंटर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। फर्जी दस्तावेजों में चाइनीज नागरिकों को ईसाई या मुस्लिम धर्म का दिखाया जाता है।

मालूम हो कि पाकिस्तान और चीन के कुछ सीमावर्ती इलाकों में आपस में शादियां होती हैं। इनके बीच लंबे अर्से से शादियां होती रही हैं। इसके अलावा पाकिस्तान में कुछ स्थानीय लोगों द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों व महिलाओं पर अत्याचार, अपहरण और दुषकर्म की खबरें भी आए दिन आती रहती हैं। बावजूद पाकिस्तान इनके खिलाफ कभी सख्त कार्रवाई करता नहीं दिखता है। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों अथवा महिलाओं पर जुल्म का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई बार उठ चुका है। उधर पाकिस्तान खुद दावा कर रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान से चीनी नागरिकों द्वारा लड़कियों की तस्करी की जा रही है। अगर ऐसा सही है तो पाकिस्तानी सरकार ने इन गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों की। जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कहीं न कहीं मसूद अजहर का वैश्विक आतंकी घोषित होना भी अहम वजह है।

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Posted By: Amit Singh

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