इस्लामाबाद, एएनआइ। कोविड-19 के संक्रमण के बीच पाकिस्तान के साथ अपने कारोबार के लिए चीन केवल सड़क मार्ग खोलना चाहता है। हालांकि दोनों सरकारों के बीच गुलाम कश्मीर स्थित खुनजरेब सीमा तक व्यापार शुरू करने पर समझौता हो चुका है। चीन ने इसी साल एक मई से खुनजरेब सीमा पर व्यापार शुरू करने का फैसला लिया था। लेकिन कोविड-19 के चलते चीन इस समझौते को अब तक लागू नहीं कर पाया है। बल्कि यहां पर इससे पहले लॉकडाउन लगा हुआ था।

दस जुलाई से खोलेगा सीमा

पाकिस्तान टुडे से मिली जानकारी के अनुसार इस्लामाबाद में 30 जून को वाणिज्य मंत्रालय में चीनी अधिकारियों से मुलाकात के बाद गिलगित-बाल्टिस्तान के निर्यातकों-आयातकों के संगठन के प्रमुख जावेद हुसैन ने बताया कि आगामी दस जुलाई से चीन सामान सीमा पार ले जाने की इजाजत दे देगा लेकिन इस दिशा में आगे के घटनाक्रम को लेकर अभी भी संशय है।

दोनों देशों में रजामंदी

उन्होंने बताया कि बैठक में तय हुआ था कि तीन जुलाई को ही बार्डर खोल दिया जाएगा लेकिन अब हम लोगों को दस जुलाई की दूसरी तारीख दी गई है। समुद्र तल से पांच हजार मीटर ऊपर पाकिस्तान के कब्जे वाले गुलाम कश्मीर में स्थित खुनजरेब दर्रे में चीन और पाकिस्तान के व्यापारिक मार्ग का मुख्य केंद्र होगा। यही दर्रा दक्षिण एशिया और यूरोप के बीच अहम कड़ी भी होगा।

कोरोना के चलते बंद रखी थी सीमा

चीन मुख्यत: कपड़े, कृषि उत्पादों और रोजमर्रा की वस्तुओं का आयात करता है और पौधों और औषधियों का निर्यात करता है। इससे पहले पाकिस्तान ने चीन से सीमा पार से व्यापार करने के लिए रास्ता खोलने को कहा था ताकि कारोबार और दोनों देशों के लोगों के बीच मेलजोल बढ़े। पाकिस्तान स्थित चीनी दूतावास को भेजे गए पत्र में लिखा था कि एक दिसंबर 2019 को ठंड के मौसम के कारण सीमा बंद कर दी गई थी जो एक अप्रैल 2020 को खोली जाएगी। लेकिन कोरोना फैलने के कारण फिर इस सीमा को बंद ही रखा गया था।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर चीनी सेना की नजर

समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हवाई में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे से 1800 मील के दायरे में चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) ने कंबोडिया, तंजानिया, किरबती समेत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के नए सैन्य अड्डों को स्थापित करना शुरू कर दिया है।

क्‍या चाहता है चीन

विदेश नीति पर क्रेग सिंगलटन ने कहा कि चीन के इच्छित देशों में तंजानिया, कंबोडिया और यूएई हैं और अब किरबिती भी इसी दायरे में आ गया है। यह सभी इलाके हवाई पर निशाना साधने के दायरे में आते हैं। इस तरह से चीन ताइवान से आगे बढ़कर भी क्षेत्र में अपना झंडा बुलंद करना चाहता है।

Edited By: Krishna Bihari Singh