इस्लामाबाद, आइएएनएस। कश्मीर को लेकर दुनिया भर में झूठा प्रचार करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के लिए घरेलू मोर्चे पर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। उनकी खुद की कुर्सी ही हिलती नजर आने लगी है। उन्हें मोहरा बनाकर कभी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) को किनारे लगाने वाली सेना और चरमपंथी अब इमरान को ही किनारे लगाने की जुगत में भिड़े नजर आ रहे हैं। पाक सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा जहां कारोबारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं, वहीं चरमपंथी नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने 'आजादी' मार्च के साथ सरकार के खिलाफ जंग का एलान कर दिया है।

इमरान की ध्यान भटकाने की कोशिश  

पाकिस्तान को कंगाली की अवस्था में पहुंचाने के लिए आलोचना का शिकार होने वाले इमरान खान कश्मीर का मसला भड़का कर लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सेना प्रमुख और जमीयत नेता रहमान हकीकत को समझ रहे हैं और उसी के मुताबिक अपनी योजना बनाने में जुट गए हैं।

युवाओं की उम्मीदों को पूरा करने में विफल

वर्ष 1996 में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी का गठन कर सियासी सफर शुरू करने वाले इमरान खान 17 अगस्त, 2018 को पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। लेकिन वह देश के लोगों खासकर युवाओं की उम्मीदों को पूरा करने में बुरी तरह विफल रहे। उनकी सरकार के सत्ता में आने के एक साल के भीतर ही बेरोजगारी और गरीबी चरम पर पहुंच गई। इसको लेकर जब उनकी सरकार से सवाल पूछे जाने लगे तो इमरान ने भारत के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी और कश्मीर का मसला उठाकर ध्यान भटकाने की कोशिश की।

इमरान का दावा, धार्मिक कार्ड नहीं खेल पाएंगे

जमीयत प्रमुख फजलुर रहमान ने पेशावर में शनिवार को सरकार के खिलाफ आजादी मार्च की घोषणा करते हुए कहा कि यह तभी खत्म होगा जब सरकार चली जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरा देश उनके लिए युद्ध का मैदान होगा। प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि मौलाना फजलुर रहमान पीपीपी और पीएमएल-एन की तरफ से सरकार के खिलाफ धार्मिक कार्ड हालात का फायदा नहीं उठा पाएंगे।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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