कराची, एएनआइ। पाकिस्तान में एक बस पर हुए हमले में अपने नौ इंजीनियरों की मौत से नाराज चीन ने 50 अरब डालर की चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) परियोजना का कामकाज संभालने वाले उच्चस्तरीय निकाय संयुक्त समन्वय समिति की 10वीं बैठक स्थगित कर दी है। इसके अलावा उसने वहां अरबों डालर की दासू जलविद्युत परियोजना भी रोक दी है।

निक्केई एशिया के मुताबिक, कोशिस्तान जिले में चीन की अगुआई में दासू जलविद्युत परियोजना के निर्माण के दौरान हुए इस हमले में नौ चीनी इंजीनियरों समेत 13 लोगों की मौत हुई थी। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने इसे बस में तकनीकी दिक्कतों की वजह से हुआ हादसा बताया था। इस बयान पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और विस्फोट की जांच कराने की मांग की थी। पाकिस्तानी अधिकारियों को बाद में घटनास्थल पर विस्फोटकों के सुराग मिले थे। मामले की जांच के लिए 15 चीनी जांचकर्ताओं की टीम भी पाकिस्तान पहुंची थी।

आतंकवाद की कवरेज करने वाले वरिष्ठ विश्लेषक फखार काकाखेल का कहना है, 'स्वाभाविक रूप से ये सीपीईसी को बाधित करने के प्रयास हैं। पूर्व में कई हमलों का निशाना बलूचिस्तान में सीपीईसी के बाहरी इलाके थे, लेकिन इस बार यह चीन के नजदीक हुआ।' विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला पाकिस्तान में चीनी हितों को बड़ा झटका है। निक्केई एशिया ने काकाखेल के हवाले से कहा कि अफगानिस्तान के अशांत हालात भी पाकिस्तान में और मुश्किलें पैदा करेंगे जहां सीपीईसी मुख्य रूप से निशाने पर है।

इस बीच, चीन ने पाकिस्तान से उसके देश में चीनी कर्मियों के समक्ष सुरक्षा खतरों की पहचान करने के लिए कहा है। चीन के स्टेट काउंसलर और जन सुरक्षा मंत्री झाओ केझी ने पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री शेख राशिद अहमद से उक्त हालिया हमले के बारे में बातचीत भी की। दरअसल, चीनी नागरिकों पर हो रहे लगातार हमलों के बाद अब पाकिस्तान के लिए बीजिंग को आश्वस्त करना जरूरी है कि वह आतंकी समूहों से चीन के बुनियादी ढांचे और उसके नागरिकों की रक्षा कर सकता है। यह बात अलग है कि वह उनसे अपने ही बुनियादी ढांचे और नागरिकों की सुरक्षा करने में विफल रहा है।