नई दिल्ली। एंफन के बाद अब देश के कुछ राज्य निसर्ग नाम के चक्रवाती तूफान से परेशान हैं। मुंबई और गुजरात के अलावा कुछ राज्यों में इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। इस बीच लोगों के मन में एक सवाल ये भी उठ रहा है कि आखिर इन तूफानों का नाम किस आधार पर रखा जाता है। ऐसी कौन सी संस्था है जो इन तूफानों का नामकरण कर देती है। हम आपको बताते हैं कि इन तूफानों का नाम कैसे रखा जाता है और इस नामकरण की प्रक्रिया में कौन-कौन से देश शामिल हैं। इसके अलावा आने वाले समय में तूफानों को और किन-किन नामों से जाना जाएगा।

अब उत्तरी हिंद महासागर और अरब सागर में भविष्य में उठने वाले तूफानों को ‘शाहीन’, ‘गुलाब’, ‘तेज’, ‘अग्नि’ और ‘आग’ जैसे नामों से जाना जाएगा क्योंकि 13 देशों द्वारा भविष्य के लिए सुझाए गए कुल 169 नामों में ये नाम भी शामिल हैं। भारतीय मौसम विभाग की ओर से इसके बारे में जानकारी भी दी गई। इससे पहले तूफानों का नामकरण साल 2004 तक आठ देशों ने मिलकर किया था। अब इसमें और भी देशों को शामिल किया गया है। इस तरह से अब इनकी संख्या 13 तक पहुंच गई है।  

क्यों दिया जाता है नाम 

यदि एक चक्रवात की गति 34 समुद्री मील प्रति घंटे से अधिक है तो इसे एक विशेष नाम देना आवश्यक हो जाता है। यदि तूफान की हवा की गति 74 मील प्रति घंटे तक पहुंचती है या पार हो जाती है, तो इसे तूफान / चक्रवात / तूफान में वर्गीकृत किया जाता है। एंफन और निसर्ग इन दोनों चक्रवाती तूफानों की गति इस मानक से कहीं अधिक रिकार्ड की गई इसी वजह से इनको नाम दिया गया। 

कहां से आया साइक्लोन शब्द 

'साइक्लोन शब्द ग्रीक शब्द' साइक्लोस से लिया गया है जिसका अर्थ है सांप का जमाव। चक्रवात एक कम दबाव वाले क्षेत्र के आसपास वायुमंडलीय गड़बड़ी द्वारा निर्मित होते हैं। चक्रवात आमतौर पर हिंसक तूफान और गंभीर मौसम की स्थिति के साथ होते हैं। उष्णकटिबंधीय चक्रवात एक गहरे निम्न दबाव वाला क्षेत्र है। ये इतने खतरनाक होते हैं कि इनकी चपेट में जो भी चीजें आती हैं वो सब अस्त व्यस्त हो जाती हैं। पेड़, बिजली के खंभे आदि सब उखड़ जाते हैं। इनके आने से बड़े पैमाने पर नुकसान होता है। 

इससे पहले बंगाल की खाड़ी में आए एंफन तूफान का नाम थाईलैंड ने प्रस्तावित किया था। ये उस सूची का आखिरी नाम था। मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि इसके मद्देनजर 2018 में भविष्य में तूफानों का नाम रखने के लिए एक समिति गठित की गई थी। इस समिति में शामिल बांग्लादेश, भारत, ईरान, मालदीव, म्यांमा, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन ने 13-13 नाम सुझाए हैं। 

फिलहाल 13 नामों में से किया गया चुनाव 

उन्होंने बताया कि फिलहाल बताए गए नामों में से 13 नामों को चुना गया है, वे हैं, बांग्लादेश द्वारा प्रस्तावित ‘अर्नब’, कतर द्वारा प्रस्तावित ‘शाहीन’, पाकिस्तान द्वारा प्रस्तावित ‘लुलु’, म्यांमा द्वारा प्रस्तावित ‘पिंकू’, कतर द्वारा प्रस्तावित ‘बहार’, भारत द्वारा प्रस्तावित ‘गति’, ‘तेज’ और ‘मुरासु’ (तमिल वाद्य यंत्र), ‘आग’, ‘नीर’, ‘प्रभंजन’, ‘अम्बुद’, ‘जलधि’ और ‘वेग’ आदि हैं। साल 2017 में चक्रवात "ओखी" आया था। बांग्लादेश ने भी इसको नाम दिया था, जिसका अर्थ बंगाली भाषा में "आंख" है। हाल ही में चक्रवात फोनी भी आया था, इसका नाम भी बांग्लादेश द्वारा रखा गया था।  

पहले 8 देश थे शामिल अब बढ़ाई गई संख्या  

तूफानों के नामकरण की प्रक्रिया 15 साल पहले यानि 2004 में हुई थी। दरअसल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में आने वाले समुद्री तूफानों के नाम रखने का सिलसिला उसी समय शुरू हुआ था। नामकरण की इस प्रक्रिया के लिए एक सूची बनाई गई। इस सूची में पहले 8 देशों को शामिल किया गया। यदि किसी तूफान की संभावना दिखती है तो इन 8 देशों को क्रमानुसार 8 नाम देने होते थे।

उसके बाद जब जिस देश का नंबर आता है तो उस देश की सूची में दिए गए नाम के आधार पर उस तूफान का नामकरण कर दिया जाता है। इनमें बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल थे। इन सभी ने 8 नाम पहले ही दे दिए हैं। इस तरह कुल 64 नाम पहले से तय किए गए थे। अब इसमें देशों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है। अब इन सभी ने नाम दे दिए हैं। इसी में पहला नाम निसर्ग रखा गया है। 

Posted By: Vinay Tiwari

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