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फिनलैंड में खुलेगा दुनिया का पहला परमाणु कचरा भंडार, नहीं होगा रेडिएशन का खतरा

Published: Sun, 25 Oct 2026 02:00 PM (IST)

फिनलैंड दुनिया का पहला देश बन गया है जो परमाणु कचरे को स्थायी रूप से जमीन के नीचे सुरक्षित रखेगा, जिसके लिए ओनकालो केंद्र को लाइसेंस मिला है।

एआई से बनी तस्वीर।

एआई से बनी तस्वीर।

HighLights

  1. फिनलैंड में पहला स्थायी परमाणु कचरा भंडार ओनकालो खुला।

  2. कचरे को तांबे के डिब्बों में रखकर जमीन के नीचे सील किया जाएगा।

  3. एक लाख साल बाद रेडिएशन प्राकृतिक स्तर पर आ जाएगा।

डिजिटल डेस्क, हेलसिंकी। फिनलैंड दुनिया का ऐसा पहला देश देश बनने जा रहा है जहां से इस्तेमाल हो चुके परमाणु ईंधन को सुरक्षित रखने के उपाय किए जा रहे हैं। परमाणु के कचरे को जमीन के नीचे सुरक्षित रखा जाएगा।

दुनिया का पहला देश बनने की उपलब्धि के बीच उसे कई चुनौतियों से भी जूझना पड़ा। कई अहम परीक्षणों से गुजरना पड़ा। सभी रिपोर्टों के सही और सुरक्षित पाए जाने के बाद सरकार ने हाल ही में ओनकालो केंद्र को संचालित करने का लाइसेंस दिया है।

अभी क्या है दुनिया में मौजूदा व्यवस्था

अभी फिलहाल किसी भी देश में परमाणु कचरे को रखने की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। सभी देश इसे अस्थायी भंडारण केंद्रों में रखा जाता है।

क्या है इस केंद्र की सुविधा

जमीन के नीचे बने इस संरचना की शुरुआत 22 साल पहले शुरू हुई थी। ओनकालो में बने केंद्र में फिनलैंड के पांच परमाणु रिएक्टरों से निकलने वाले कचरा रखा जा सकता है। इसकी क्षमता 6500 टन यूरेनियम की है।

कैसे रखा जाएगा कचरा

कचरे को पहले तांबे के डिब्बे में रखा जाएगा। इस डिब्बे की खासियत यह होगी कि इसमें जंग नहीं लगेगा। इसके बाद इसे चट्टान के नीचे गड्ढे में रखा जाएगा। इसके आसपास खास तरह की मिट्टी रखी जाएगी और फिर उसे कंक्रीट से जाम कर दिया जाएगा। इससे कचरा आसानी से बाहर नहीं निकल पाएगा।

कंपनी ने बताया कि एक लाख साल के बाद इस कचरे से निकलने वाला रेडिएशन घट जाएगा। इससे ये प्राकृतिक यूरेनियम के स्तर के करीब पहुंच जाएगा जिससे खतरा कम हो जाएगा। इसके बाद इससे परमाणु ईंधन बनाया जा सकता है।

भारतः परमाणु कचरा निपटाने का विनोदी 3-चरण का चक्र

भारत में फिलहाल 24 परमाणु रिएक्टर केंद्र हैं। अब तक एक भी मुख्य रिएक्टर बंद नहीं हुआ है। भारत परमाणु कचरे के प्रबंधन के लिए अपनी अनूठी 'क्लोज्ड फ्यूल साइकिल' नीति पर काम करता है। इसके तहत इस्तेमाल हो चुके ईंधन को फेंका नहीं जाता।

उसे दुबारा पुनः संसाधित कर फिर से ऊर्जा बनाने के काबिल बना कर इस्तेमाल किया जाए। इससे रेडियोधर्मी कचरे की मात्रा काफी कम हो जाती है। वहीं बाकी बचे कचरे को गहरे जगहों पर सुरक्षित सील कर रखा जाता है।

बता दें कि पुराने परमाणु संयंत्रों को हटाने और कचरे को सुरक्षित रखने में बहुत पैसा खर्च हो जाता है। ऐसे किसी तरह कचरे का निष्पादन खतरनाक हो जाता है। इसके लिए पैसे और तकनीक दोनों का होना जरूरी है।

पारदर्शी नहीं होना और कमजोर निगरानी की वजह से भविष्य में पर्यावरण का संकट गहरा सकता है। 1986 की चेरनोबिल परमाणु दुर्घटना इसका उदाहरण है।

दुनिया में बंद हो चुके हैं कई रिएक्टर

दुनिया में 40 से अधिक रिएक्टर अमेरिका में बंद हुए हैं। इसके बाद ब्रिटेन में 36, जापान में 24, फ्रांस में 15 और रूस में 11 रिएक्टर बंद हुए हैं।

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