सिओल (रायटर्स)। उत्‍तर कोरिया ने सोमवार को जापान सागर की तरफ दो शार्ट रेंज बैलेस्टिक मिसाइल लान्‍च कर बड़ा संकेत देने की कोशिश की है। इस मिसाइल लान्‍च से जहां दक्षिण कोरिया और जापान की चिंता बढ़ी है वहीं अमेरिका भी हैरान हो गया है। ऐसा इसलिए भी है क्‍योंकि उत्‍तर कोरिया अपने मिसाइल प्रोग्राम के चलते पहले से ही कड़े प्रतिबंध झेल रहा है। अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया में जिस तरह से उसकी अर्थव्‍यवस्‍था की बदहाली की खबरें सामने आई हैं उसको देखते हुए इस माह में चार बार मिसाइल टेस्‍ट करना अपने आप में कई तरह के सवाल खड़ा कर रहा है।

आपको बता दें कि वर्ष 2017 में आखिरी बार उत्‍तर कोरिया ने बैलेस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया था, जिसको सफल बताया गया था। तब के बाद अब उत्‍तर कोरिया ने बैलेस्टिक मिसाइल लान्‍च की है वो भी एक नहीं दो। ये मिसाइल चार मिनट के अंतराल पर प्‍योंगयोंग एयरफील्‍ड से लान्‍च की गई थीं। आखिर पांच वर्ष बाद उत्‍तर कोरिया को इस तरह की कवायद करने की क्‍या जरूरत पड़ी। इस सवाल का जवाब जापान के पास है। जापान के मुख्‍य सचिव हिरोकाजू मतसुनो ने उत्‍तर कोरिया के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ये केवल अमेरिका और दूसरे देशों पर दबाव की रणनीति के तहत उठाया गया कदम है। उन्‍होंने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह के कदम से क्षेत्र की सुरक्षा और शांति पर खतरा आ सकता है। ये विश्‍व समुदाय के लिए भी एक चिंता की बात है।

आपको बता दें कि इससे पहले किए गए तीन परीक्षणों में उत्‍तर कोरिया ने हाइपरसोनिक मिसाइल लान्‍च की थीं, जो परमाणु हमला करने में सक्षम बताई गई थीं। हालांकि इनमें से कोई भी लंबी दूरी की मिसाइल नहीं थी। हाइपरसोनिक मिसाइल अपनी जबरदस्‍त स्‍पीड के लिए जानी जाती है। इसको इंटरसेप्‍ट करना भी आसान नहीं होता है। इसलिए ही ये दुनिया की खतरनाक मिसाइलों में गिनी भी जाती है। कुछ दिन पहले ही उत्‍तर कोरिया ने दो टेक्टिकल मिसाइल ट्रेन से लान्‍च की थी।

सिओल स्थित हानकुक यूनिवर्सिटी के फोरेन स्‍टडीज के प्रोफेसर मेसन रिचे का कहना है कि हर मिसाइल प्रक्षेपण से पता चलता है कि अमेरिका उत्‍तर कोरिया पर कड़े प्रतिबंध लगाने में विफल साबित हुआ है। उनकी निगाह में उत्‍तर कोरिया पर अब तक लगे प्रतिबंध कहीं न कहीं नाकाम साबित हुए हैं। गौरतलब है कि पिछले मिसाइल टेस्‍ट के बाद अमेरिकी प्रशासन की तरफ से उत्‍तर कोरिया पर प्रतिबंध और कड़े किए गए थे। इतना ही नहीं सुरक्षा परिषद में भी इसको लेकर चर्चा हुई थी और कड़े प्रतिबंध लगाने की वकालत की गई थी।

यहां पर ये भी बताना जरूरी है कि वर्ष 2019 के बाद से अब तक उत्‍तर कोरिया और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को रद करने को लेकर किसी तरह की कोई वार्ता नहीं हुई है। इससे पहले पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के समय में उत्‍तर कोरिया से दो बार आमने सामने की वार्ता हुई थी। हालांकि ये वार्ता दोनों ही बार विफल साबित हुई थी। इसके बाद भी किम और ट्रंप के बीच बेहद कम समय की मुलाकात होती रहीं थीं। ट्रंप राष्‍ट्रपति पद पर रहते हुए उत्‍तर कोरिया की सीमा में कदम रखने वाले पहले राष्‍ट्रपति भी बने थे।

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Edited By: Kamal Verma