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फ्रांस में फिर आंदोलन की चेतावनी, सेना संभालेगी मोर्चा

Published: Tue, 20 Oct 2026 10:56 PM (IST)

फ्रांस में हिंसा और लूटपाट के बाद प्रशासन की सख्ती से हालात काबू में आए हैं, लेकिन तनाव बरकरार है। ...और पढ़ें

फ्रांस में फिर आंदोलन की चेतावनी। (रॉयटर्स)

फ्रांस में फिर आंदोलन की चेतावनी। (रॉयटर्स)

HighLights

  1. फ्रांस में हिंसा के बाद 2400 गिरफ्तार, तनाव कायम।

  2. नए आंदोलन की चेतावनी पर सेना की तैनाती पर विचार।

  3. इटली, पुर्तगाल और अल्बानिया में भी प्रदर्शन जारी।

जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। फ्रांस में शनिवार की हिंसा और लूटपाट के बाद प्रशासन की सख्ती और कर्फ्यू से हालात काबू में आए हैं, लेकिन तनाव अब भी कायम है। सड़कों पर बिखरे मलबे को साफ किया जा रहा है और नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। लूटपाट के आरोप में अब तक 2400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

हालांकि, संगठनों ने सप्ताहांत में फिर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है, जिसके बाद सेना तैनात करने पर विचार किया जा रहा है। उधर, हिंसक प्रदर्शनों से प्रभावित इटली मिलान में सेना के 500 जवान तैनात करने की तैयारी कर रहा है। पुर्तगाल में आवास के लिए प्रदर्शन कर रहे लोगों के शिविर हटा दिए गए और विरोध कर रहे 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया। अल्बानिया में प्रधानमंत्री एदी रामा की सरकार के खिलाफ छात्र सड़कों पर हैं।

रायटर्स के अनुसार, फ्रांस के पेरिस, मार्सेय और ल्योन समेत कई शहरों में रात के कर्फ्यू से हालात कुछ शांत हुए हैं। रात में पुलिस हेलीकाप्टरों से गश्त करती रही। सरकार ने हालात के अनुसार हफ्तेभर रात का कर्फ्यू लगाने का आदेश दिया है। प्रधानमंत्री सेबास्तियां लेकोर्नू ने कहा कि चुनिंदा इलाकों में लगाए गए कर्फ्यू से शांति बनाए रखने में मदद मिली। जरूरत पड़ने पर पाबंदियां आगे भी जारी रह सकती हैं।

प्रदर्शनों के पीछे शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, सार्वजनिक सेवाओं के लिए पर्याप्त धन न मिलने और बढ़ती महंगाई को लेकर नाराजगी है। हिंसा और लूटपाट ने कारोबारियों की चिंता बढ़ाई है। छात्र संगठनों और ईंधन की कीमतों के खिलाफ सक्रिय समूहों ने आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्यालय ने मंगलवार को बताया कि महंगाई कम करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन से हर महीने अतिरिक्त 200,000 टन डीजल आयात किया जाएगा। सऊदी अरब से 95,000 टन डीजल के साथ ऊर्जा कीमतों को घटाने में मदद मिलेगी।

पेरिस में आंदोलन से सबसे ज्यादा प्रभावित प्लेस डी ला रिपब्लिक इलाके में क्रेन की मदद से चौक पर लगी प्रतिमा से पीली जैकेट हटाई गई। आपत्तिजनक ग्रैफिटी को पानी की तेज धार से साफ किया गया। कचरे के डब्बे, जलाई गई ई-बाइक और अन्य बिखरी चीजों को हटाया गया। हिंसा और तोड़फोड़ के दोषियों को सजा सुनाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

लिली में 20 से 25 वर्ष के तीन दोषियों को 10 महीने की सजा सुनाई गई है। पेरिस में 300 लोगों को अदालतों में पेश किया गया है। फ्रांस की संसद का निचला सदन, नेशनल असेंबली 17 अक्टूबर की हिंसा के मामले में पुलिस रणनीति की जांच करेगा।

इटली में 500 सैनिक, नाबालिगों पर सख्ती की तैयारी

एपी के अनुसार, फ्रांस में हिंसा के बाद इटली में भी सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की सरकार मिलान में 500 सैनिक तैनात करने और पुलिस को अतिरिक्त अधिकार देने की तैयारी कर रही है। सप्ताहांत में मिलान सहित कई शहरों में झड़पों, दुकानों में लूटपाट और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं हुई थीं। सरकार नाबालिगों से जुड़े मामलों में भी कड़े कदम उठाना चाहती है।

प्रस्तावित उपायों में ऐसे नाबालिगों को 12 घंटे तक पुलिस थाने में रखने का प्रविधान शामिल है, जिनसे खतरा पैदा होने की आशंका हो। बढ़ती ऊर्जा कीमतों और आय में असमानता ने आर्थिक दबाव को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।

पुर्तगाल में शिविर हटे, अल्बानिया में प्रदर्शन जारी

पुर्तगाल की पुलिस ने मंगलवार तड़के लिस्बन और पोर्तो के केंद्रीय चौकों से आवास संकट के खिलाफ लगाए गए शिविर हटा दिए। लिस्बन के रोसियो चौक पर करीब 200 तंबू लगाए गए थे। पुलिस ने 55 लोगों को गिरफ्तार किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि घर खरीदना और किराये पर लेना आम लोगों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए आंदोलन फिर शुरू करने की बात कही है।

उधर, अल्बानिया की राजधानी तिराना में छात्र प्रधानमंत्री एदी रामा की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन में शिक्षा की स्थिति और भ्रष्टाचार को लेकर नाराजगी भी शामिल है। हालिया प्रदर्शनों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई हैं।