नई दिल्ली। देश में पाया जाने वाला पैंगोलिन एक ऐसा जानवर है जिसकी दुनिया में सबसे अधिक तस्‍करी होती है। पैंगोलिन के मांस को चीन और वियतनाम समेत कुछ दूसरे देशों में बेहद चाव से खाया जाता है, इसका दूसरा उपयोग दवाओं के निर्माण में भी होता है। खासतौर पर चीन की पारंपरिक दवाओं के निर्माण में इसका ज्‍यादा इस्‍तेमाल होता है। बीते एक दशक के दौरान दस लाख से अधिक पैंगोलिन की तस्‍करी की जा चुकी है।

यही वजह है कि ये दुनिया का सबसे अधिक तस्‍करी किए जाने वाला जानवर बन गया है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजरवेशन ऑफ नेचर के मुताबिक दुनियाभर के वन्‍य जीवों की अवैध तस्‍करी में अकेले 20 फीसद का योगदान पैंगोलिन का ही है। आपको यहां पर ये भी बता दें कि चीन और वियतनाम में इसका मांस खाना अमीर होने की निशानी है। कुछ दिन पहले झारखंड के जामताड़ा इलाके में एक पैंगोलिन पाया गया। इसको गांव के कुछ लोग उठाकर ले आए थे। उन्होंने इसको अपने पास रख लिया था।

झारखंड में पाया गया पैंगोलिन 

किसी तरह से वन विभाग को इसकी जानकारी मिली तो वो मौके पर पहुंचे और पैंगोलिन को अपने कब्जे में लेकर उसे जंगल में छोड़ा। एक आइएफएस अधिकारी ने अपने ट्वीटर हैंडल से इस वीडियो को ट्वीट भी किया है। उसके बाद काफी लोगों ने इस वीडियो को देखा। 

रनचापड़ आदिवासी टोला के लोगों को मिला था पैंगोलिन 

झारखंड के कुंडहित प्रखंड के बाबूपुर पंचायत अन्तर्गत रनचापड़ आदिवासी टोला के लोगों को हल्दीडीह जंगल में महुआ चुनने के दौरान पैंगोलिन हाथ लगा। सुबह 7 बजे गांव के बीरू किस्कू जंगल में महुआ चुनने के दौरान इस जंगली जीव को देखा तथा अपने साथ रनचापड़ गांव लाया। लोगों का कहना है कि यह मगरमच्छ है। यही सोचकर आसपास के गांव के लोग देखने को पहुंचे।

यह खबर जब वन विभाग के रेंजर प्रतिमा कुमारी को मिली वे दलबल के साथ गांव पहुंचे तथा पैंगोलिन को कब्जे में ले लिया। वन विभाग के रेंजर प्रतिमा कुमारी ने बताया कि यह जंगली जीव का नाम पेंगोलिन जिसे देहाती भाषा में चिटीखोर कहा जाता है। यह जंगली जीव जंगल में बड़े पेड़ के खोखले में रहता है। यह जीव कीट, पंतग, चींटी आदि का भोजन करते हैं।  

यहां होता है ज्‍यादा व्‍यापार 

पैंगोलिन का अवैध व्‍यापार ज्‍यादातर एशिया में ही होता है। इसके अलावा अफ्रीका में भी इसका व्‍यापार होता है। पैंगोलिन की खाल से लेकर मांस तक की कीमत हजारों में होती है। अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में इसकी खाल की कीमत 24 हजार रुपये किलो तक है। ये केरोटिन की बनी होती है। यह खाल दूसरे जानवरों से बचाव में उसकी रक्षा भी करती है। पैंगोलिन ऐसे शल्कों वाला अकेला ज्ञात स्तनधारी है। इसे भारत में सल्लू साँप भी कहते हैं। पैंगोलिन नाम मलय शब्द पेंगुलिंग से आया है, जिसका अर्थ है जो लुढ़कता है। 

चींटी खाकर करते हैं गुजारा 

गौरतलब है कि पैंगोलिन का जीवन चींटी खाकर गुजरता है। यह पृथ्‍वी पर स्तनधारी और सांप-छिपकली जैसे जानवरों के बीच की कड़ी है। ये एशिया और अफ्रीका के कई देशों में पाए जाते हैं। इनकी खाल के ऊपर ब्लेडनुमा प्लेट्स की एक परत होती है। ये इतनी मजबूत होती है कि इस पर शेर जैसे जानवर के दांतों का भी असर नहीं होता है।

चीनी चिकित्सा पद्धति में होता है इसका प्रयोग 

पैंगोलिन स्तनधारी प्राणी है, जिसके शरीर पर शल्क (स्केल) जैसी संरचना होती है। इसी के जरिए यह अन्य प्राणियों से खुद की रक्षा कर पाता है। फिलहाल ऐसे शल्क दुनिया में सिर्फ इसी के पास होते हैं। चींटी और दीमक खाने के कारण इसे चींटीखोर भी कहा जाता है। यह संरक्षित जानवर हैं। दुनिया में सर्वाधिक तस्करी इसी जीव की होती है।

इसी कारण यह गंभीर संकट में हैं। इसका उपयोग पारंपरिक चीनी चिकित्सा पद्धति में किया जाता है। इसके कुछ हिस्सों का उपयोग त्वचा और गठिया के साथ कई अन्य रोगों में किया जाता है। चीन में पैंगोलिन बेचने वालों को 10 या उससे ज्यादा साल की सजा हो सकती है।

बेहद शांत और शर्मिला जानवर है पैंगोलिन 

सबसे बड़ी हैरानी की बात ये भी है कि इस जानवर से किसी कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। ये बेहद शर्मिला होता है और इंसानों की नजरों में आने से पहले ही भाग लेता है। पैंगोलिन अपना आशियाना ज्‍यादातर जमीन के नीचे बिल बनाकर या फिर सूखे और खोखले हो चुके पेड़ों में बनाता है। लेकिन पैसों के लालच में तस्‍कर इसकी जान को नहीं बख्‍शते हैं।

यह शर्मीला स्तनपायी सबसे ज्यादा तस्करी किया जाने वाला जानवर है और इसका इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्यों जैसे कि भोजन और पारंपरिक चिकित्सा के लिए किया जाता है। इसकी सभी आठ प्रजातियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत संरक्षित किए जाने के बावजूद, कुछ एशियाई देशों में पैंगोलिन के मांस को खाया भी जाता है।

Posted By: Vinay Tiwari

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