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डेनांग, रायटर। घोषित कार्यक्रम से इतर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर मिल बैठे। दोनों के बीच इस तरह की अघोषित मुलाकात जर्मनी के बाद दूसरी बार वियतनाम में हुई। दोनों नेताओं ने सीरिया में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) के खात्मे का संकल्प लिया।

रूसी राष्ट्रपति के क्रेमलिन कार्यालय ने मुलाकात के संबंध में बयान जारी किया है लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के व्हाइट हाउस कार्यालय ने इस पर फिलहाल को प्रतिक्रिया नहीं जताई है। दोनों नेता एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय देशों की आर्थिक सहयोग परिषद की बैठक में भाग लेने के लिए वियतनाम आए हैं।

सीरिया में कमजोर पड़ते आइएस को खत्म करने की अमेरिका और रूस में सहमति बन गई है। यह बात क्रेमलिन ने कही है। इस बाबत दोनों नेताओं की ओर से संयुक्त बयान दोनों देशों के विदेश मंत्री आपसी विचार-विमर्श से जारी करेंगे। क्रेमलिन ने कहा है कि दोनों नेता सीरिया की संप्रभुता, आजादी और क्षेत्रीय स्थिरता बरकरार रखने पर सहमत हैं। यह भी मानते हैं कि सभी संबद्ध पक्षों को जिनेवा राजनीतिक प्रक्रिया के तहत गतिरोध खत्म करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।

दोनों देश इस बारे में भी सहमत हैं कि सीरिया संकट का सैन्य समाधान संभव नहीं है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि दोनों नेताओं के बीच कोई बैठक प्रस्तावित नहीं थी। शुक्रवार को रात्रि भोज के समय दोनों नेता आमने-सामने आए। इस दौरान दोनों ने हाथ मिलाकर कुछ मिनट बात की। टेलीविजन फुटेज में ट्रंप और पुतिन मंच पर बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह फुटेज उस समय का है जब मंच पर वे अन्य नेताओं के साथ फोटो देने के लिए आए थे।

अमेरिका को छोड़ आगे बढ़ेंगे एशिया-प्रशांत देश

अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 11 देश मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने को तैयार हो गए हैं। आर्थिक सहयोग परिषद की बैठक में इस बाबत ठोस फैसला किया गया। वियतनाम के व्यापार मामलों के मंत्री ट्रान टुआन अन्ह ने यह जानकारी दी है। जापान के वित्त मंत्री तोशीमिशु मोतेगी ने आशा जताई है कि ताजा समझौते से क्षेत्र व्यापारिक स्थिरता आएगी और उसका विकास होगा।

कई वर्षो के विचार-विमर्श के बाद राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रयास से 2016 में अमेरिकी अगुआई में ट्रांस पैसीफिक पार्टनरशिप हुई थी। इसे चीन के खिलाफ आर्थिक गठजोड़ के तौर पर लिया गया था लेकिन इसी साल ट्रंप के समझौता तोड़ देने से हालात बदल गए। इसलिए इन देशों ने अब अमेरिका को छोड़कर गठबंधन बनाया है।

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Posted By: Ravindra Pratap Sing

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