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ढाका यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर लगाने पर घमासान, छात्रों ने फाड़ी तस्वीरें

Published: Wed, 16 Sep 2026 02:21 AM (IST)

बांग्लादेश की प्रतिष्ठित ढाका यूनिवर्सिटी में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाने पर ऐसा सियासी और भावनात्मक ...और पढ़ें

ढाका यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर लगाने पर घमासान

ढाका यूनिवर्सिटी में जिन्ना की तस्वीर लगाने पर घमासान

HighLights

  1. छात्र संघ द्वारा जिन्ना की तस्वीरें प्रदर्शित करने पर भड़का आक्रोश, छात्रों ने फाड़ी तस्वीरें

  2. विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिया कड़ा संज्ञान, पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित

पीटीआई, ढाका। बांग्लादेश की प्रतिष्ठित ढाका यूनिवर्सिटी में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाने पर ऐसा सियासी और भावनात्मक तूफान उठा है, जिसने पूरे देश के इतिहास और अस्मिता की बहस को फिर से जिंदा कर दिया है।

विवाद की सुलगती चिंगारी तब भड़की जब 'ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन' ने, जिसके नेतृत्व पर जमात-ए-इस्लामी के छात्र संगठन 'इस्लामी छात्र शिविर' का दबदबा है, यूनिवर्सिटी के पुनर्गठित संग्रहालय को दोबारा खोला।

इस संग्रहालय में जिन्ना और उपमहाद्वीप के इतिहास से जुड़ी तस्वीरें और पुरानी कतरनें लगाई गईं। इनमें 1948 के उस कुख्यात भाषण की तस्वीर भी शामिल थी, जिसमें जिन्ना ने ढाका के रेसकोर्स मैदान में यह ऐलान किया था कि उर्दू ही पाकिस्तान की एकमात्र राजभाषा होगी।

यह प्रदर्शन उन लाखों बंगालियों की भावनाओं पर सीधा आघात था, जिन्होंने 1952 के भाषा आंदोलन और 1971 के मुक्ति संग्राम में अपना खून बहाया था। बांग्ला अस्मिता के इस गढ़ में जिन्ना का चेहरा देखकर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा।

सोमवार को एक छात्र ने संग्रहालय में घुसकर जिन्ना की तस्वीरें फाड़ डालीं। वहीं, वामपंथी छात्रों ने विरोध का अनूठा तरीका निकालते हुए पूर्व जमात प्रमुख गुलाम आजम की जूतों से पिटाई वाली तस्वीर वहां चस्पा कर दी।

सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के छात्र संगठन (जातिवादी छात्र दल) सहित कई छात्र संगठनों ने इसे यूनिवर्सिटी की गरिमा पर एक "कलंक" करार दिया है।

छात्रों के उबलते गुस्से को भांपते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया है। प्रशासन ने बिना प्रशासनिक अनुमति के ऐसी संवेदनशील तस्वीरें लगाने के कारणों का पता लगाने के लिए प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर मोहम्मद अलमुजद्दादे अलफसाने की अध्यक्षता में एक पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है।

दूसरी ओर, 'ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन' नेतृत्व ने सफाई दी है कि उनका मकसद जिन्ना का महिमामंडन करना नहीं, बल्कि इतिहास के काले पन्नों और भाषा के प्रति उनके विरोध को बतौर दस्तावेज दिखाना था।

बहरहाल, शेख हसीना सरकार के पतन के बाद देश के राजनीतिक इतिहास और मुक्ति संग्राम की विरासत को लेकर मचे घमासान के बीच यह विवाद अब एक गंभीर राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है।