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'कानून तोड़ने वाली ताकतें सुरक्षा परिषद में बैठी हैं', UN प्रमुख ने की वैश्विक शक्तियों की आलोचना

Published: Thu, 17 Sep 2026 04:20 PM (IST)

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में बैठी वैश्विक शक्तियों की कड़ी आलोचना की, जो खुद अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती हैं।

UN प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने की वैश्विक शक्तियों की आलोचना (फोटो-रॉयटर्स)

UN प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने की वैश्विक शक्तियों की आलोचना (फोटो-रॉयटर्स)

HighLights

  1. संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद की कड़ी आलोचना की।

  2. वैश्विक शक्तियां अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़कर परिषद को पंगु बना रही हैं।

  3. गुटेरेस ने सुरक्षा परिषद में सुधार और सत्ता के पुनर्वितरण पर जोर दिया।

डिजिटल डेस्क, जेनेवा। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि जो वैश्विक शक्तियां खुद अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती हैं, वे ही सुरक्षा परिषद में बैठी हैं। इससे सुरक्षा परिषद पंगु हो गई है। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक संस्था में सुधार सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

गुटेरेस ने सत्ता के पुनर्वितरण की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी सुरक्षा परिषद का होना स्वीकार्य नहीं है, जिसकी संरचना आज की दुनिया को दिखाने के बजाय कई दशक पहले की दुनिया को दिखाती हो।

गुटेरेस ने वैश्विक शक्तियों की आलोचना 

गुटेरेस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषण के लकवाग्रस्त होने से ऐसी स्थिति पैदा हो गई है, जिसमें दुनिया भर के हर देश को लगता है कि उन्हें जो चाहे वह करने का हक है। वे जानते हैं कि वे बिना किसी सजा के ऐसा कर सकते हैं।

इस बेखौफ रवैये ने ऐसा माहौल बना दिया है, जिसमें हम देख रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा देश अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ब्रिक्स जैसे संगठनों को पावर शिफ्ट को दिखाने के मामले में मौजूदा व्यवस्था के पूरक या विकल्प के तौर पर देखते हैं, उन्होंने कहा कि आज की संस्थाएं कई दशक पहले के शक्ति संबंधों को दिखाती हैं, जिनमें से ज्यादातर दूसरे विश्व युद्ध के समय बनी थीं।

दुनिया बदल रही है, और हम नई ताकतों का उदय देख रहे हैं और आज, अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था को देखें, तो हर दिन ग्लोबल जीडीपी में विकसित देशों का हिस्सा थोड़ा कम हो रहा है और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा थोड़ा बढ़ रहा है।

आज दुनिया में देशों का जो सापेक्ष महत्व है, उसमें उस समय की तुलना में बदलाव आया है जब ये संस्थाएं बनाई गई थीं। इसलिए, सत्ता के संबंध अब दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरूप नहीं हैं। सत्ता का पुनर्वितरण होना चाहिए।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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