संयुक्त राष्ट्र महासचिव बनने की दौड़ में शामिल हुईं यूएई की मंत्री नुसेइबेह, 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है गुटेरस का कार्यकाल
संयुक्त राष्ट्र संघ के अगले महासचिव का पद हासिल करने को लेकर मुकाबला अब और दिलचस्प हो गया है। महासचिव ...और पढ़ें

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बनने की दौड़ में शामिल हुईं यूएई की मंत्री नुसेइबेह
HighLights
महासचिव के चुनाव को लेकर सुरक्षा परिषद में गतिरोध के बीच यूएई ने उतारा अपना उम्मीदवार
31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है गुटेरस का कार्यकाल, उत्तराधिकारी बनने के आठ दावेदार
आईएएनएस, संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र संघ के अगले महासचिव का पद हासिल करने को लेकर मुकाबला अब और दिलचस्प हो गया है। महासचिव के चुनाव को लेकर सुरक्षा परिषद में गतिरोध के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की लाना नुसेइबेह भी इस पद की दौड़ में शामिल हो गई हैं।
यूएई ने विदेश मामलों की अपनी राज्यमंत्री नुसेइबेह को बुधवार को उम्मीदवार नोमिनेट किया। इसके साथ ही महासचिव एंटोनियो गुटेरस के उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में शामिल उम्मीदवारों की संख्या आठ हो गई है। गुटेरेस का कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है।
नुसेइबेह ऐसे समय में मैदान में उतरी हैं, जब सुरक्षा परिषद में पहले से मौजूद उम्मीदवारों को हालिया अनौपचारिक मतदान में कम से कम दो स्थायी सदस्यों के नकारात्मक वोट मिले हैं। ऐसे में नए उम्मीदवार के सामने पांचों स्थायी सदस्यों का समर्थन हासिल करने की बड़ी चुनौती होगी।
गौरतलब है कि नुसेइबेह योग प्रेमी हैं। अपने देश की स्थायी प्रतिनिधि रहते हुए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोहों में अहम भूमिका निभाई थी। स्थायी प्रतिनिधि के रूप में 11 साल का कार्यकाल 2024 में पूरा करने के बाद वह मंत्री बनीं। चुनाव लड़ने के लिए वह मंत्री पद छोड़ रही हैं।
नुसेइबेह के लिए संयुक्त राष्ट्र महासचिव बनने की दौड़ आसान नहीं होगी। महासचिव पद के अन्य उम्मीदवारों में संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (अंकटाड) की प्रमुख रेबेका ग्रीनस्पैन, गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिरकेट और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आइएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रासी भी शामिल हैं।
हालिया मतदान में इन तीनों को भी कम से कम दो स्थायी सदस्यों के नकारात्मक वोट मिले। संयुक्त राष्ट्र के 80 साल के इतिहास में अब तक नौ पुरुष महासचिव रह चुके हैं। इसलिए इस बार किसी महिला को यह जिम्मेदारी सौंपने की मांग उठ रही है।
