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तुर्कीये में मीडिया दमन और जेल में बंद पत्रकारों के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग, बोले- 'अब हम सांस नहीं ले सकते'

Published: Sun, 25 Oct 2026 12:31 AM (IST)

तुर्किये के अंकारा शहर में करीब 3,000 लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। पत्रकारों, अधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी प्रतिनिधियों ने 'काफी ...और पढ़ें

तुर्कीये में मीडिया दमन और जेल में बंद पत्रकारों के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग (फोटो- रॉयटर)

तुर्कीये में मीडिया दमन और जेल में बंद पत्रकारों के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग (फोटो- रॉयटर)

HighLights

  1. अंकारा में करीब 3,000 लोग प्रदर्शन में शामिल हुए

  2. पिछले दो महीनों में अधिकारियों ने 11 पत्रकारों को जेल भेजा है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तुर्कीये के इस्तांबुल और अंकारा में शनिवार को हजारों लोग सड़कों पर उतरे। उन्होंने स्वतंत्र मीडिया पर बढ़ते सरकारी दबाव, गिरफ्तारियों, सेंसरशिप और न्यूज आउटलेट्स के अधिग्रहण के खिलाफ प्रदर्शन किया।

पुलिस के अनुसार अंकारा में करीब 3,000 लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। पत्रकारों, अधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी प्रतिनिधियों ने 'काफी हो चुका' और 'अब हम सांस नहीं ले सकते' जैसे नारे लगाए। उन्होंने प्रेस की आजादी और जेल में बंद पत्रकारों की रिहाई की मांग की।

इस्तांबुल में प्रदर्शनकारियों ने कैद पत्रकारों की तस्वीरें दिखाते हुए कहा, “हम चुप नहीं रहेंगे। काफी हो चुका!” और “हम दबाव के आगे नहीं झुकेंगे”।

तुर्कीये जर्नलिस्ट्स यूनियन के अनुसार पिछले दो महीनों में अधिकारियों ने 11 पत्रकारों को जेल भेजा है और कई मीडिया आउटलेट्स बंद कर दिए हैं। इस महीने पुलिस ने तुर्की के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले न्यूज चैनल हाल्क टीवी पर छापा मारा, उसका प्रसारण रोक दिया और सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक बैठा दिया।

अधिकारियों ने डिजिटल न्यूज आउटलेट टी24 की वेबसाइट और सोशल मीडिया अकाउंट्स भी एलजीबीटी प्रचार के आरोप में बंद कर दिए।

2016 के असफल तख्तापलट के प्रयास के बाद से तुर्कीये में प्रेस की आजादी पर लगातार दबाव बढ़ा है। पत्रकारों पर मुकदमे चलाए जाते हैं और डिजिटल सेंसरशिप लागू की जाती है। सरकार मीडिया कर्मियों पर फर्जी खबरें फैलाने का आरोप भी लगाती रही है।

वरिष्ठ पत्रकार जाफर अरापकिरली ने इस्तांबुल प्रदर्शन के बाद कहा कि यह जमावड़ा सिर्फ पत्रकारों के समर्थन में नहीं है। यह समाज के सूचना और समाचार तक पहुंच के अधिकार की रक्षा के बारे में भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी गिरफ्तारियों और प्रतिबंधों के जरिए जनता को डराना चाहते हैं।