काठमांडु, एजेंसियां। चीन की शह पर भारत से सीमा विवाद करने और संसद में नया नक्शा पारित कर भारतीय क्षेत्र को नेपाल में दिखाए जाने के बाद नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। इस बात पर खुद उन्हीं की पार्टी उनके खिलाफ हो गई है। स्थायी समिति की बैठक में उन्हीं की पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनसे इस्तीफा मांग लिया है। मीडिया की रिपोर्टो के मुताबिक, सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के सह अध्यक्ष पुष्प कमल दहल प्रचंड या बामदेव गौतम नेपाल के अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं। सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थायी समिति की बैठक में प्रचंड और अन्य वरिष्ठ नेता माधव नेपाल, झाला नाथ खनाल और बामदेव गौतम ने भारत के साथ ताजा विवाद, कोरोना वायरस से निपटने सहित विभिन्न मुद्दों पर उनकी विफलता का हवाला देते हुए पीएम केपी ओली का इस्तीफा मांगा।

पीएम का इस्तीफा हम मांग रहे हैं न कि भारत

प्रचंड ने पीएम ओली के बयान पर हैरानी जाहिर करते हुए कहा है कि वह पीएम का इस्तीफा मांग रहे हैं न कि aभारत। आरोप लगाया गया कि सरकार भारत के साथ सीमा विवाद पर बातचीत करने में विफल रही है।

ओली के विवादास्पद बयान पर सवाल उठाया

हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पिछले शनिवार की बैठक में 48 सदस्यीय स्थायी समिति के ज्यादातर सदस्यों ने भारत को लेकर हाल के ओली के विवादास्पद बयान पर सवाल उठाया। पीएम ओली ने दावा किया था कि नेपाली नक्शे में संविधान संशोधन के बाद से उनके खिलाफ साजिशें रची जा रही हैं। उन्हें पद से हटाने के लिए खुली दौड़ हो रही है। किसी ने सोचा नहीं था कि नक्शे को छापने के लिए किसी पीएम को पद से हटाया जाएगा। विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली ने कहा था कि सरकार ने सीमा मुद्दे पर भारत के साथ बातचीत करने की बहुत कोशिश की, लेकिन भारत ने बातचीत में दिलचस्पी नहीं दिखाई।

कुर्सी बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं पीएम ओली

उधर, पार्टी की स्थायी समिति की बैठक में प्रचंड ने कहा कि पीएम ओली खुद की कुर्सी बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। प्रचंड ने आरोप लगाया कि ओली पीएम की कुर्सी को बचाने के लिए नेपाली सेना का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने सुना है कि पीएम ओली सत्ता में बने रहने के लिए पाकिस्तानी, अफगानी या बांग्लादेशी मॉडल को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस तरह के प्रयास नेपाल में सफल नहीं होंगे।

अध्यक्ष पद और पीएम पद में से ओली को कोई एक पद चुनना पड़ेगा

पार्टी की स्थायी समिति की पिछली बैठक में प्रचंड ने साफ तौर पर कहा था कि पार्टी के अध्यक्ष पद और प्रधानमंत्री पद में से ओली को कोई एक पद चुनना पड़ेगा। सरकार और पार्टी के बीच समन्वय का अभाव है। वह एनसीपी द्वारा 'एक व्यक्ति एक पद की नीति' का पालन करने पर जोर दे रहे है। केपी शर्मा ओली सरकार जिस तरीके से कोविड-19 संकट से निपट रही है, वह दोनों नेताओं के बीच मतभेद का एक मुख्य मुद्दा है। अभी ओली प्रधानमंत्री के साथ एनसीपी के अध्यक्ष भी हैं। इसी मतभेद के चलते ओली पहले दो दिन की बैठक में शामिल नहीं हुए।

सरकार से हटाने का किया जा रहा है प्रयास 

पीएम केपी शर्मा ओली ने पिछले रविवार को दावा किया था कि उनकी सरकार द्वारा तीन प्रमुख भारतीय क्षेत्रों को देश के मानचित्र में शामिल करने के बाद उन्हें पद से हटाने का प्रयास किया जा रहा है। किसी व्यक्ति या देश का नाम लिए बगैर ओली ने दावा किया, मुझे सत्ता से हटाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन यह सफल नहीं होगा। प्रधानमंत्री ओली ने दावा किया था कि काठमांडू के एक होटल में उन्हें हटाने के लिए बैठकें की जा रही है और इसमें एक दूतावास भी सक्रिय है। दूतावासों और होटलों में कई तरह की गतिविधियां हुई हैं। यदि आप दिल्ली से समाचार मीडिया को सुनते हैं, तो आपको इशारा मिलेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें हटाने के लिए कुछ नेपाली नेता भी इस खेल में शामिल हैं।

ओली का दावा, पद से हटाने के लिए हो रही खुली दौड़

पीएम ओली ने दावा किया कि नेपाली नक्शे में संविधान संशोधन के बाद से उनके खिलाफ साजिशें रची जा रही हैं। मुझे पद से हटाने के लिए खुली दौड़ हो रही है। किसी ने सोचा नहीं था कि नक्शे को छापने के लिए किसी पीएम को पद से हटाया जाएगा।

Posted By: Arun Kumar Singh

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